छिंदवाड़ा में राहत भरी खबर: सुरक्षित बच्चों की संख्या बढ़ी
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक सकारात्मक खबर सामने आई है, जहां जहरीली कोल्ड्रिफ खांसी की दवा लेने वाले 200 से अधिक बच्चों को सुरक्षित पाया गया है। इससे पहले इस खांसी की दवा के सेवन से 22 बच्चों की दुखद मौत हो चुकी थी। इस मामले में परासिया के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
बच्चों की स्थिति और राहत कार्य
पिछले 176 पन्नों के रिकॉर्ड की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इन बच्चों को कोल्ड्रिफ नामक खांसी की दवा दी गई थी। अधिकारियों ने तुरंत ही बच्चों के परिजनों से संपर्क कर जानकारी ली। राहत की बात यह है कि सभी बच्चे अब स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम और जांच
अधिकारियों ने खांसी की दवाओं के बचे हुए बोतलों को जब्त करना शुरू कर दिया है। आशा वर्कर घर-घर जाकर इन सिरप की बोतलों को इकट्ठा कर रही हैं। इस काम में लगभग 200 से अधिक कर्मचारी लगे हुए हैं।
मामले का पूरा विवरण और जांच प्रक्रिया
अक्टूबर 2025 में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ नामक खांसी की दवा के सेवन से कम से कम 22 बच्चों की मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि इन मौतों का कारण किडनी फेल्योर था, जो कि कोल्ड्रिफ सिरप में मौजूद जहरीले रसायन डायएथिलीन ग्लाइकोल के कारण हुआ। यह रसायन आमतौर पर औद्योगिक उपकरणों जैसे ब्रेक फ्लुइड और एंटीफ्रीज में प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग दवाओं में करना अत्यंत खतरनाक और गैरकानूनी है।
यह मामला पूरे देश में चिंता का विषय बन गया है। मध्य प्रदेश के अलावा केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने भी कोल्ड्रिफ सिरप के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकारें मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा और प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रही हैं।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा मानक
पुलिस ने इस गंभीर मामले की जांच के तहत दवा निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के खिलाफ हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया है। कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है।











