छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली Coldrif कफ सिरप के सेवन से नौ मासूम बच्चों की जान जाने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इन बच्चों में से एक उसैद नाम का तीन साल का बच्चा भी शामिल है, जिसके घर पर मातम पसरा हुआ है। उसैद का जन्मदिन 10 अक्टूबर को था, लेकिन उससे पहले ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था और दवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक बच्चे के परिवार का दर्द और सिस्टम की लापरवाही
उसैद की मां अफसाना ने इस घटना के बाद दिए अपने इंटरव्यू में अपने गहरे दुख और सिस्टम की विफलता का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके बेटे को जो कफ सिरप दी गई, वह डॉक्टर की सलाह पर ही दी गई थी। अफसाना ने कहा कि उनके बेटे को बुखार था, इसलिए उन्होंने डॉक्टर की सलाह मानकर Coldrif कफ सिरप का इस्तेमाल किया। कुछ दिनों बाद बुखार तो उतर गया, लेकिन बच्चे के हाथ-पैर सूज गए और पेशाब रुकने लगी। डॉक्टर ने कहा कि स्थिति गंभीर है और तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा। अस्पताल में इलाज समझ न आने पर वे नागपुर चले गए, जहां जांच में पता चला कि बच्चे की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं।
सामूहिक जिम्मेदारी और न्याय की मांग
अफसाना का कहना है कि यह सिरप न केवल उनके बेटे की मौत का कारण बना, बल्कि इससे और भी कई बच्चों की जान गई है। उन्होंने सरकार और संबंधित कंपनियों से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि यह दवा जहर थी, जिसे उन्होंने अपने बच्चों को दिया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले पता होता कि यह जहर है, तो वे कभी भी इसे नहीं देते। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि दवा बनाने वाली कंपनी को कठोर सजा मिलनी चाहिए और दोषियों को सजा दिलाने के लिए वे संघर्ष करेंगी।
सिस्टम की लापरवाही और भविष्य के खतरे
अफसाना ने यह भी बताया कि उनके बेटे को पहली बार 25 अगस्त को बुखार आया था, और 31 अगस्त को वे डॉक्टर के पास गए। उसके बाद 6 सितंबर को नागपुर ले गए, जहां जांच में पता चला कि उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने शुरुआत में ही सही जानकारी नहीं दी और रातभर बच्चे को बेड पर छोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने उनके विश्वास को पूरी तरह से तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही पूरे सिस्टम की गलती है और अब उनका भरोसा स्वास्थ्य विभाग पर से उठ चुका है।











