मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर अपराधियों ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को फंसाया है। इस जालसाजी में पहले उसे मोटे मुनाफे का भरोसा दिलाया गया, फिर धीरे-धीरे करोड़ों रुपये निवेश कराए गए। जब उसने अपने पैसे वापस लेने का प्रयास किया, तो ठगों ने नई-नई शर्तें रखकर उससे और अधिक रकम की मांग शुरू कर दी। अंततः उसे एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड का शिकार बन चुका है। इस मामले की जांच के लिए राज्य साइबर सेल सक्रिय हो गई है।
साइबर ठगों ने कैसे किया धोखा, पूरी कहानी
ग्वालियर के इंदरगंज क्षेत्र में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को दिसंबर 2025 में व्हाट्सएप पर एक महिला का संदेश मिला। उसने अपना नाम दिव्या सिंह बताया और दावा किया कि वह डिजिटल एसेट्स में निवेश कर कम समय में अधिक लाभ दिला सकती है। कुछ दिनों की बातचीत के बाद, महिला ने एक निवेश पोर्टल का लिंक भेजा, जहां अशोक ने अपना खाता बनाया। शुरुआत में छोटी रकम निवेश कराई गई और पोर्टल पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया गया। यहां तक कि उन्हें कुछ राशि निकालने का मौका भी दिया गया, जिससे उनका भरोसा मजबूत हो गया।
बड़ी रकम निवेश के बाद धोखाधड़ी का खुलासा
विश्वास बढ़ने के साथ ही अशोक विजयवर्गीय ने अपनी कुल जमा रकम को जून 2026 तक विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस दौरान, उसने कुल 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये का निवेश किया। लेकिन जब उसने अपनी पूरी रकम और मुनाफा निकालने का प्रयास किया, तो ठगों ने टैक्स, सिक्योरिटी डिपॉजिट और रिस्क मार्जिन जैसे बहानों का सहारा लेकर और अधिक रकम की मांग शुरू कर दी। यहां तक कि महिला ने खुद भी आधी रकम जमा कराने का झांसा देकर उससे और पैसे हड़प लिए। हर बार नई शर्तें और मांगें सामने आने लगीं, जिससे उसकी आशंका बढ़ गई।
जब अशोक ने अपने परिचितों से सलाह ली, तो उसे पता चला कि वह एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के जाल में फंस चुका है। इसके बाद उसने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम देश के कई राज्यों के बैंक खातों में भेजी गई है, जिनमें दक्षिण भारत के खातों की संख्या सबसे अधिक है। अब जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और आरोपियों के नेटवर्क को जोड़ने में लगी हैं।











