भोपाल के स्मारक अस्पताल में जटिल कैंसर सर्जरी
भोपाल स्थित स्मारक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (BMHRC) के कैंसर सर्जरी विभाग में विदिशा की 35 वर्षीय महिला के लिए एक अत्यंत कठिन और जटिल सर्जरी का आयोजन किया गया। यह महिला मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिसमें समय के साथ कूल्हे पर मौजूद एक गांठ ने कैंसर के ट्यूमर का रूप ले लिया था। इस गांठ का आकार सामान्य से कई गुना बढ़ चुका था, जिससे महिला को चलने, बैठने और सोने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
मुफ्त इलाज और जटिलताओं का सामना
महिला की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण, निजी अस्पतालों में इस तरह की जटिल सर्जरी पर तीन से चार लाख रुपये तक का खर्च आ सकता था। लेकिन बीएमएचआरसी में आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका इलाज पूरी तरह से मुफ्त किया गया। कैंसर सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ सोनवीर गौतम ने बताया कि महिला विदिशा की रहने वाली हैं और उनके तीन छोटे बच्चे हैं। उनके कूल्हे पर मौजूद ट्यूमर बहुत बड़ा और रक्तवाहिनियों से भरा हुआ था, जिनके ऊपर और आसपास की नसें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थीं।
सर्जरी की जटिल प्रक्रिया और सफलता
यदि एक ही बार में ट्यूमर को हटाने का प्रयास किया जाता, तो अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता, जो जानलेवा भी हो सकता था। इस जोखिम को देखते हुए, विशेषज्ञों ने इसे तीन चरणों में करने का निर्णय लिया। इन तीनों सर्जरियों को बीस दिनों के भीतर पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कनिका सुहाग की अध्यक्षता में एनीस्थीशियोलॉजी विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रथम चरण में, ट्यूमर तक पहुंचने वाली बड़ी रक्तवाहिनियों की रक्त आपूर्ति रोक दी गई (डीवेस्कुलराइजेशन), ताकि खून बहने का खतरा कम हो। दूसरे चरण में, रेडियोलॉजी विभाग के विजिटिंग इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ अंकित शाह ने एम्बोलाइजेशन कर ट्यूमर के अंदर की छोटी रक्तवाहिनियों को बंद किया। इससे रक्त प्रवाह घट गया। अंतिम चरण में, जब रक्तस्राव का खतरा नियंत्रित हो गया, तो पूरी सावधानी से ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया। वर्तमान में, मरीज की स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।
मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस और विशेषज्ञता का महत्व
यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें नसों पर गांठें बनती हैं। यह लगभग 2500 से 3000 लोगों में से एक को प्रभावित करता है। अधिकतर मामलों में ये गांठें सामान्य रहती हैं, लेकिन कुछ मामलों में वे तेजी से बढ़कर कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसलिए, नियमित जांच और समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक हैं।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि इतने बड़े और जटिल ट्यूमर की सर्जरी के लिए विशेष अनुभव और टीम वर्क जरूरी होता है। हमारी विशेषज्ञ टीम ने चरणबद्ध तरीके से इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। हमें गर्व है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को निशुल्क और सुरक्षित उपचार मिल सका। हमारा उद्देश्य है कि गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बीएमएचआरसी में भरोसेमंद और विशेषज्ञ सेवाएं मिलें।









