भोपाल मेट्रो का पहला महीना: चुनौतियों का सामना
भोपाल मेट्रो का कमर्शियल संचालन आज एक माह पूरा कर चुका है, लेकिन यह अभी भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया है। 20 दिसंबर को भव्य उद्घाटन के साथ शुरू हुई यह मेट्रो सेवा यात्रियों की संख्या में निरंतर गिरावट के कारण अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। इस दौरान, मेट्रो को चलाने का खर्चा उसकी आय से कहीं अधिक हो रहा है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिति चिंताजनक बन गई है।
आंकड़ों में स्पष्ट हैं मेट्रो की परेशानियां
मेट्रो के पहले महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 21 दिसंबर से शुरू हुई इस सेवा का दैनिक संचालन खर्च लगभग 8 लाख रुपये है। वहीं, टिकट बिक्री से प्रतिदिन औसतन लगभग 39,152 रुपये की आय हो रही है। वर्तमान में, मेट्रो के शुरुआती चरण में रोजाना करीब 1290 टिकटें बिक रही हैं। यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट ने मेट्रो प्रबंधन को 14 दिनों के भीतर अपने शेड्यूल में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अब यह सेवा सुबह 12 बजे शुरू होती है और शाम 7:30 बजे तक ही चलती है, जबकि शुरुआत में यह सुबह 9 बजे से चल रही थी।
यात्रियों की कमी के कारण बढ़ी चुनौतियां
मेट्रो के पहले चरण में आठ स्टेशन हैं, लेकिन सीमित कनेक्टिविटी और ट्रेनों के बीच समय के बड़े अंतर ने यात्रियों की संख्या को प्रभावित किया है। उदाहरण के तौर पर, एम्स से फ्लाई मेट्रो दोपहर 12 बजे शुरू होती है, जबकि अगली मेट्रो लगभग 1 घंटे 15 मिनट बाद यानी 1:15 पर आती है। इस वजह से, शहर के लोग लंबा इंतजार करने के बजाय निजी वाहनों का ही सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कनेक्टिविटी बढ़ने से इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा। मेट्रो बनाने और चलाने में भारी निवेश होता है, लेकिन कम यात्रियों के कारण किराए से पर्याप्त आय नहीं हो पाती, जिससे परिचालन घाटा बढ़ता है। भोपाल जैसे शहरों में लोग छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का प्रयोग अधिक करते हैं, जिससे मेट्रो की सवारी कम हो जाती है।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में यात्रियों की संख्या कम होने के बावजूद यह परियोजना दीर्घकालिक दृष्टिकोण से बनाई गई है। भविष्य में, मेट्रो का विस्तार मंडीदीप और सीहोर जैसे आसपास के शहरों तक किया जाएगा, ताकि अधिक लोग ट्रैफिक जाम से बचते हुए आसानी से यात्रा कर सकें। साथ ही, मेट्रो के विज्ञापन स्थानों का उपयोग कर आय बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।










