मध्य प्रदेश में जांच व्यवस्था की खामियां और चुनौतियां
छिंदवाड़ा में हुई त्रासदी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य प्रदेश की ड्रग जांच प्रणाली कितनी कमजोर और लचर है। यहां तीन मुख्य FDA (Food and Drug Administration) लैब हैं-भोपाल, इंदौर और जबलपुर-जो हर साल लगभग 6000 से 6500 सैंपल की जांच करने का दावा करती हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि इन लैबों की क्षमता और संसाधनों की कमी के कारण जांच प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है।
प्रत्येक साल लाखों सैंपल भेजे जाते हैं, जिनमें से केवल आधे ही समय पर जांच के लिए पहुंच पाते हैं। इस वजह से कई बार गंभीर मामलों में रिपोर्ट लंबित रह जाती है, जिससे जनता और सरकार दोनों को नुकसान होता है। खासतौर पर जब जहरिल कफ सिरप जैसे मामलों में समय पर कार्रवाई जरूरी हो, तो इन खामियों का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।
जांच में देरी के पीछे मुख्य कारण
मध्य प्रदेश में वर्तमान में करीब 79 ड्रग इंस्पेक्टर कार्यरत हैं, जिनके जिम्मे हर महीने कम से कम पांच सैंपल इकट्ठा करने का काम है। लेकिन कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी के कारण जांच की गति धीमी हो रही है। साथ ही, लैब में पद खाली होने के कारण भी संसाधनों का अभाव है। उदाहरण के तौर पर, ज्वाइंट कंट्रोलर ऑफ ड्रग टेस्टिंग लैब, कई ड्रग एनालिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और लैब असिस्टेंट जैसे पद खाली पड़े हैं, जिनकी कमी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।
इसके अलावा, सैंपल का समय पर लैब पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती है। छिंदवाड़ा से भोपाल तक दवाओं के सैंपल को तीन दिन में पहुंचाना, जबकि वह भी साधारण डाक से, यह दर्शाता है कि डाक विभाग की धीमी रफ्तार जांच में बाधा बन रही है। ग्वालियर से भेजे गए सैंपल को भी 2 दिन का समय लगा, जो जांच की गंभीरता को दर्शाता है।
सिस्टम में सुधार की आवश्यकता
ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने स्वीकार किया है कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जा रही है और लैब के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, आपातकालीन मामलों में विशेष वाहक के जरिए सैंपल भेजने की सलाह भी दी गई है। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद, मौजूदा सिस्टम में सुधार की बहुत जरूरत है।
मध्य प्रदेश की मोबाइल ड्रग टेस्टिंग वैन भी बेकार हो चुकी है, जो पहले फील्ड में जांच को तेज करने के लिए खरीदी गई थी। यह वैन अब जंग खा रही है और उपयोग में नहीं है। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार को अपनी जांच व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
अंत में, यह जरूरी है कि समय पर जांच और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके। जमीनी स्तर पर सुधार और संसाधनों का सही इस्तेमाल ही इस प्रणाली की कमजोरी को दूर कर सकता है।









