हरियाणा के सोनीपत में प्रदूषण और वन संरक्षण का गंभीर संकट
हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण ने पर्यावरणीय संकट को जन्म दिया है। विशेष रूप से एक बियर फैक्ट्री के केमिकल युक्त पानी ने वन विभाग की सुरक्षित जमीन को रेगिस्तान में बदलने का काम शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में फैली तस्वीरें इस पर्यावरणीय तबाही की सच्चाई को बयां कर रही हैं। जहां-जहां फैक्ट्रियों का जहरीला पानी पहुंचा है, वहां हजारों पेड़ सूख चुके हैं, न तो पत्तियां बची हैं और न ही टहनियों में जीवन। वातावरण पूरी तरह से उजड़ चुका है। इसके विपरीत, जहां यह विषैली जलधारा नहीं पहुंची, वहां हरियाली अभी भी कायम है, जो स्पष्ट संकेत है कि पेड़ प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि केमिकल मर्डर के शिकार हुए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप और पर्यावरणीय खतरा
स्थानीय निवासी विक्की और लक्ष्मी का कहना है कि यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला एसिड और केमिकल युक्त पानी लगातार सरकारी जमीन में रिस रहा है। विक्की ने बताया, “पीछे की फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी लगातार सरकारी जमीन की ओर छोड़ा जा रहा है। इससे हमारे मवेशी बीमार पड़ रहे हैं और भूजल इतना प्रदूषित हो चुका है कि हमें कैंसर जैसी भयानक बीमारियों का खतरा सता रहा है।” इस प्रदूषण के कारण स्थानीय समुदाय में भय और चिंता का माहौल व्याप्त है।
प्रदूषण नियंत्रण और कार्रवाई की दिशा में कदम
मामले के गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण विभाग ने तुरंत कार्रवाई की है। अधिकारियों ने बताया कि NS-4 नामक बियर फैक्ट्री की दीवार के नीचे से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी वन विभाग की सुरक्षित जमीन में जा रहा था। इस संदर्भ में, फैक्ट्री पर 39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उसे तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर कैमरे के सामने आने से बच रहे हैं, जो उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इस पर्यावरणीय संकट का समाधान जल्द से जल्द निकालना आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सके और स्थानीय समुदाय को सुरक्षित रखा जा सके।











