हरियाणा के करनाल में धान की फसल पर बारिश का असर
करनाल (Haryana) में धान की फसल अब पकने के अंतिम चरण में है, लेकिन इस समय हो रही तेज बारिश और हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पकी हुई धान की बालियां जमीन पर गिरने लगी हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा है। किसानों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह खराब रहा, तो फसल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती है।
मौसम की अनिश्चितता और किसानों की चिंताएं
किसानों का कहना है कि धान की फसल को जून, जुलाई और अगस्त में पर्याप्त बारिश की आवश्यकता थी, लेकिन उस समय अपेक्षित वर्षा नहीं हुई। अब जब फसल पककर कटाई के लिए तैयार है, तब बारिश हो रही है, जो फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। करनाल के किसान ईशम सिंह का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के कारण उनकी लगभग 50 साल की खेती में करीब 35 से 40 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
फसल की गिरावट और सरकार से मदद की मांग
ईशम सिंह ने बताया कि जब धान की बालियां पक जाती हैं और जमीन पर गिर जाती हैं, तो दाने खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि उत्पादन भी कम हो सकता है। लगातार खराब मौसम के कारण खेतों में कटाई का काम भी बाधित हो रहा है, मशीनें खेतों में नहीं चल पा रही हैं, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
किसानों ने सरकार से इस स्थिति का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसान सुमित का कहना है कि इस समय धान की फसल में बारिश की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे फसल जमीन पर गिर जाती है और दाने काले पड़ने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि हर साल फसल पकने के आसपास बारिश होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।











