दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे पर सुनवाई की
दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन क्षेत्र में दो इमारतों के गिरने के मामले में दायर PIL पर गंभीरता से विचार किया। अदालत ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD (Municipal Corporation of Delhi), दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और NHRC (National Human Rights Commission) को नोटिस जारी किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि वे दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे। इस हादसे को लेकर अगली सुनवाई 25 तारीख को निर्धारित की गई है।
सत्य निकेतन हादसे की जाँच और जिम्मेदारी तय करने का निर्देश
यह PIL उस घटना के बाद दायर की गई, जिसमें लड़कों के लिए चल रहे PG हॉस्टल की दो इमारतें गिर गई थीं। इन इमारतों में लगभग 50 छात्र रह रहे थे, जिनमें से कम से कम 7 की मौत हो चुकी है। कई छात्र अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि कुछ मलबे में दबे होने की आशंका है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान जाती है। उन्होंने MCD से इस दिशा में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
निर्माण अनुमति और हॉस्टल की सुरक्षा की जांच का आदेश
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि MCD के उच्चतम स्तर पर यह जांच कराई जाए कि इन इमारतों का निर्माण वैध अनुमति के साथ हुआ था या नहीं। यदि बिना अनुमति के निर्माण हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या PG हॉस्टल चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं और इनका उल्लंघन तो नहीं हो रहा। साथ ही, कोर्ट ने MCD से यह भी पूछा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध हॉस्टल का डेटा प्रस्तुत किया जाए।











