हरियाणा में बेरोजगारी का संकट और सरकार की प्रतिबद्धताएँ
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में लौटने के बाद से एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राज्य में रोजगार का मुद्दा अभी भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने 5 अक्टूबर 2024 को होने वाले विधानसभा चुनाव के अपने मेनिफेस्टो में युवाओं के लिए दो लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया था। इसके साथ ही, अप्रेंटिसशिप और औद्योगिक पहलों के माध्यम से पांच लाख अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करने का भी संकल्प लिया गया था।
बेरोजगारी और रोजगार के आंकड़े
सीएमआईई (CMIE) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में युवा बेरोजगारी दर लगभग 37 प्रतिशत है, जो देश के अन्य राज्यों में सबसे अधिक है। सरकार ने भ्रष्टाचार और अनावश्यक खर्च को समाप्त करने का भी वादा किया था। सरकार का दावा है कि उसने 34 हजार नौकरियों का सृजन किया है, जबकि विपक्ष केवल 10 से 11 हजार नौकरियों का ही जिक्र कर रहा है। बीजेपी का तर्क है कि रोजगार सृजन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसकी गति और पैमाने को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है। मेनिफेस्टो में अग्निवीरों के लिए गारंटीकृत रोजगार और 50 हजार नौकरियों का लक्ष्य भी शामिल था, साथ ही दस औद्योगिक शहर स्थापित करने का भी वादा किया गया था।
औद्योगिक और अप्रेंटिसशिप पहलें
ग्रामिण और औद्योगिक क्षेत्रों में नई पहल के तहत गुरुग्राम और हिसार में खरखौदा मॉडल से प्रेरित दो नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMTs) शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं से 2026 तक लगभग 20,000 से 30,000 नई नौकरियों के सृजन की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से निजी क्षेत्र से जुड़ी हैं। साथ ही, 50 हजार से अधिक युवा नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत नामांकित हुए हैं, जिन्हें प्रति माह 8,000 से 10,000 रुपये का वजीफा मिल रहा है। ये भूमिकाएं स्थायी सरकारी पद नहीं हैं।
सरकारी प्रयास और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के माध्यम से 31,343 पदों और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के जरिए 2,579 पदों पर भर्ती की गई है। मुख्यमंत्री सैनी ने सितंबर 2025 तक करीब 500 पूर्व अग्निवीरों को पुलिस और अर्धसैनिक बलों में शामिल करने का भी वादा किया है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि वास्तविक संख्या केवल 10 से 11 हजार के बीच है।
प्राथमिकता और युवाओं की आशाएं
सरकार ने ग्रुप C के पदों के लिए जुलाई में कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) का आयोजन किया था, लेकिन परिणाम अभी तक घोषित नहीं हुए हैं। लगभग 13 लाख आवेदक परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे युवाओं में निराशा फैल रही है। विपक्ष ने सरकार पर झूठे वादे करने का आरोप लगाया है। भूपिंदर हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री सैनी ने पांच वर्षों में दो लाख नौकरियों का वादा किया था, लेकिन केवल 11 हजार ही दे सके। वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गीता भुक्कल ने कहा कि युवाओं को अस्थायी नौकरियां दी जा रही हैं, जो नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अपराध की ओर ले जा रही हैं।
अन्य दलों की राय और सरकार का बचाव
इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के अभय चौटाला ने कहा कि सिंचाई विभाग जैसे कई पद खाली हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि PhD धारक महिलाएं मामूली मजदूरी कर रही हैं। पूर्व उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पूछा कि बीजेपी की कौन सी योजना वास्तव में सफल हो रही है। सरकार का पक्ष रखते हुए, बीजेपी के पूर्व मंत्री और विधायक मूल चंद शर्मा ने कहा कि वादे पूरे किए जाएंगे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने दावा किया कि 217 चुनावी वादों में से 48 पूरे हो चुके हैं और 90 पर कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनी सरकार ने शुरुआत में ही 25,000 नौकरियां दी हैं।
स्थानीय युवाओं की स्थिति और भविष्य की उम्मीदें
पंचकूला के युवा वर्ग में रोजगार को लेकर असंतोष व्याप्त है। एक युवा ने कहा कि रोजगार की कमी है और सरकारी नौकरी का सपना टूट चुका है। दूसरे ने कहा कि खर्चे बढ़ रहे हैं और सरकार को इस दिशा में अधिक ध्यान देना चाहिए। इन सबके बीच, युवाओं की उम्मीदें अभी भी बनी हुई हैं कि सरकार उनके लिए बेहतर अवसर लाएगी।











