ब्रिटेन में भारतीय मूल के परिवार की सफलता की कहानी
हरियाणा के रोहतक निवासी एक सामान्य परिवार आज ब्रिटेन की राजनीति में चमकता सितारा बन चुका है। 2013 में बेहतर भविष्य की खोज में UK (United Kingdom) गए सुनील दहिया के परिवार के लिए यह गर्व का पल है। उनके 23 वर्षीय पुत्र तुषार कुमार को एल्स्ट्री (Elstry) और बोरहमवुड (Borehamwood) टाउन काउंसिल का मेयर चुना गया है, वहीं उनकी पत्नी परवीन रानी को हर्ट्समेयर (Hertsmere) बरो काउंसिल की पहली भारतीय मूल की मेयर बनने का सम्मान मिला है।
परिवार की सफलता का सफर और राजनीतिक सफर
सुनील दहिया ने बताया कि जब वह अपनी पत्नी परवीन और दो बच्चों के साथ 2013 में UK गए थे, तो उनके मन में कोई विशेष योजना नहीं थी। उस समय तुषार केवल 10 साल का था। आज यह गर्व की बात है कि भारतीय मूल के इस परिवार की मां और बेटे दोनों ही एक ही समय पर ब्रिटेन की राजनीति में महत्वपूर्ण पदों पर हैं।
तुषार ने 20 वर्ष की उम्र में पार्षद (काउंसलर) का पद संभाला था। उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज (King’s College) से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। जब वे कॉलेज में दूसरे वर्ष के छात्र थे, तभी उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। इस साल सितंबर में वे अपनी मास्टर्स (Masters) की डिग्री भी शुरू करेंगे। उनके पिता ने बताया कि उनका छोटा बेटा भी किंग्स कॉलेज से ही अपनी पढ़ाई कर रहा है और वह कॉलेज के स्टूडेंट्स यूनियन (Students Union) में ट्रस्टी के रूप में भी कार्यरत है।
सामाजिक सेवा और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
तुषार और उनकी मां ने 2023 में पहली बार चुनाव लड़ा था और दोनों ही काउंसलर चुने गए। परवीन पहले ‘स्ट्रीटसीन, पार्क, लेजर और कल्चर’ की कैबिनेट सदस्य, हर्ट्समीयर (Hertsmere) की डिप्टी मेयर और ‘फिल्म और टेलीविजन’ की ग्लोबल एनवॉय (Global Envoy) के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
पिता ने बताया कि तुषार और उनकी मां को समाज की सेवा करना बहुत पसंद है। तुषार ने हाल ही में एल्स्ट्री और बोरहमवुड के मेयर का पद संभाला है। वे 2023 में इन टाउन काउंसिल में शामिल हुए थे और पहले डिप्टी मेयर के रूप में भी काम कर चुके हैं।
पिता ने यह भी बताया कि तुषार और उनकी मां UK में जन्मे और पले-बढ़े हैं, और वे मुफ्त में हिंदी भाषा भी सिखाते हैं। तुषार एक चैरिटी संस्था हिंदी शिक्षा परिषद (Hindi Education Council) से भी जुड़े हैं।
आज भी उनका परिवार हरियाणा में अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। उनका एक घर रोहतक में है, जहां परिवार के कुछ सदस्य रहते हैं। तुषार का मानना है कि समाज सेवा में उम्र कभी बाधा नहीं होनी चाहिए। उनका संदेश है कि युवा बिना किसी इंतजार के समाज और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं।
उनके पिता का मानना है कि इंसान को अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़े रहना चाहिए। तुषार को अपने भारतीय मूल पर गर्व है, साथ ही उन्हें ब्रिटेन के विविध संस्कृतियों वाले शहर पर भी गर्व है, जहां वे सेवा कर रहे हैं।











