हरियाणा में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का कोई भी कदम बिना उचित जांच और निर्धारित परिस्थितियों के नहीं लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने नाम को अपडेट कराने के लिए 21 अगस्त से 20 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।
श्रीनिवास ने यह भी बताया कि जो मतदाता अपने फॉर्म को समय पर जमा कर देंगे, उनका नाम बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के प्रारंभिक वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि नाम कटने की प्रक्रिया केवल तभी शुरू होगी जब स्थानीय जांच में कोई विशेष कारण पाए जाएंगे।
नाम कटने के कारण और प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता का नाम केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही हटाया जा सकता है। इनमें शामिल हैं यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर रजिस्ट्रेशन हो, उसकी मृत्यु हो चुकी हो, वह स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो गया हो, वेरिफिकेशन के बाद भी उसका पता न मिल रहा हो, या फिर मतदाता फॉर्म पर साइन करने से मना कर रहा हो।
यदि किसी मतदाता का फॉर्म वापस नहीं मिलता है, तो बीएलओ उसकी मौत, पलायन या गैर-मौजूदगी जैसी स्थितियों की एक सूची तैयार करेंगे। इस सूची को राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय एजेंटों के साथ चर्चा के बाद संबंधित विभागीय नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया जाएगा।
आवेदन और आपत्तियों का समयसीमा एवं प्रक्रिया
14 जुलाई तक पात्र मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य के माध्यम से या ऑनलाइन फॉर्म जमा कर सकते हैं, जिसमें किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद, 21 अगस्त से 20 सितंबर तक मतदाता अपनी दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 और सुधार के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जाएगा।
श्रीनिवास ने बताया कि 1 जुलाई तक हरियाणा में 95.09 प्रतिशत इन्यूमरेट फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें से 32.66 प्रतिशत को डिजिटाइज भी किया गया है। उन्होंने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और समय पर पूरा किया जाए।











