दिल्ली के मालवीय नगर होटल में भीषण आग से परिवार की तबाही
दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित एक होटल में लगी आग ने गुरुग्राम के एक खुशहाल परिवार की पूरी दुनिया बदल दी। उस परिवार ने अपने बुजुर्ग पिता की अंतिम घड़ियों में उनके साथ रहने का फैसला किया था, लेकिन यह मुलाकात उनके जीवन की आखिरी मुलाकात बन गई। इस दर्दनाक हादसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, दो बेटियां, माता और अन्य रिश्तेदारों सहित कुल आठ लोगों की मौत हो गई।
पिता की गंभीर बीमारी और परिवार का अंतिम मिलन
47 वर्षीय सीए विवेक अग्रवाल के पिता लंबे समय से फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें दिल्ली के मालवीय नगर स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया था कि उनके पिता की स्थिति अत्यंत नाजुक है और उनके पास बहुत कम समय बचा है। पिता की गंभीर स्थिति की खबर मिलते ही विवेक ने अपने पूरे परिवार को दिल्ली बुलाना शुरू कर दिया। उनकी बड़ी बेटी जीविशा, जो बेंगलुरु (Bangalore) में बीटेक की पढ़ाई कर रही थी, तुरंत दिल्ली पहुंची। इसके बाद विवेक अपनी पत्नी तर्जनी, छोटी बेटी वर्या और मां प्रेमलता के साथ अस्पताल पहुंचे। परिवार का उद्देश्य था कि सभी बुजुर्ग पिता से मिल सकें और उनके साथ कुछ पल बिता सकें।
आग का कहर और परिवार का अंतहीन शोक
जैसे ही परिवार के सदस्य अस्पताल में मिले, उन्होंने तय किया कि वे घर लौटने के बजाय पास के होटल में रुकेंगे, ताकि यदि पिता की हालत अचानक बिगड़ी तो तुरंत अस्पताल पहुंच सकें। लेकिन रात को ही होटल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते धुआं और आग की लपटें पूरे इलाके में फैल गईं। होटल में मौजूद सभी लोग फंस गए और बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। दम घुटने और झुलसने के कारण आठ लोगों की मौत हो गई। इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर गुरुग्राम में देखने को मिली, जब एक ही समय में पांच शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। श्मशान घाट पर एक साथ पति-पत्नी, मां और दो मासूम बेटियों की चिताएं जलीं, जो हर किसी के दिल को झकझोर देने वाली थी।











