सुप्रीम कोर्ट में विदेशों में पासपोर्ट व वीजा सेवाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भारत के विदेशों में स्थित दूतावासों में पासपोर्ट और वीजा सेवाओं से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई करेगा। यह सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा आउटसोर्सिंग टेंडर को रद्द करने के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर होगी। इस फैसले के बाद अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा जैसे देशों में भारतीय दूतावासों में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाओं में बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं। लाखों भारतीय जो विदेशों में रहते हैं, इन सेवाओं के प्रभावित होने से परेशान हैं।
हाईकोर्ट का फैसला और विदेशों में भारतीयों पर प्रभाव
15 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने इन चार मिशनों में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाओं के संचालन के लिए केरल की कंपनी ‘अलहिंद टूर्स एंड ट्रेवल्स’ को दिया गया कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था। अदालत ने तर्क दिया कि टेंडर प्रक्रिया में बोली का मूल्यांकन मनमाने ढंग से किया गया और साथ ही विदेश मंत्रालय की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आपत्तियों पर भी पर्याप्त विचार नहीं किया गया। इस फैसले के कारण इन मिशनों में सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं, जिससे भारतीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और प्रभावित भारतीय नागरिक
केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन मिशनों में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाएं लगभग बंद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि नए ऑपरेटर के तुरंत काम शुरू करने की स्थिति नहीं है। इस मामले को 20 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इससे प्रभावित भारतीय नागरिकों में चिंता व्याप्त है, खासकर उन लोगों में जो यात्रा, पारिवारिक मामलों या कानूनी आवश्यकताओं के लिए इन सेवाओं पर निर्भर हैं।









