सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल सुधारों का बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट ने अपने प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल पहल शुरू की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने बताया कि कोर्ट परिसर में नई सुरक्षा प्रवेश व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है, ताकि कोर्ट की सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार हो सके। इसके साथ ही, कोर्ट ने केस प्रबंधन के लिए एक नवीनतम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है, जो उन मामलों की निगरानी करेगा जो ट्रायल कोर्ट या हाईकोर्ट में लंबित हैं क्योंकि उनकी सुनवाई या आदेश सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से केस ट्रैकिंग और सुरक्षा बढ़ेगी
यह नई प्रणाली ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के मामलों का संपूर्ण डेटा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-से केस कहां और क्यों रुके हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि यह कदम कोर्ट के प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और वकीलों तथा मुकदमेबाजों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। 29 जनवरी 2026 को, उन्होंने बार के सदस्यों को संबोधित करते हुए बताया कि केस प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक आईटी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यह पता चल सके कि कौन-से मामले सुप्रीम कोर्ट की वजह से निचली अदालतों में अटके हैं।
संपूर्ण डेटा और नए भुगतान व सुरक्षा सिस्टम
इसके अलावा, कोर्ट ने एक नया ऑनलाइन भुगतान प्रणाली भी शुरू की है, जिसके माध्यम से वकील और मुकदमेबाज AOR परीक्षा फीस, क्रेच फीस जैसी प्रशासनिक फीस एक ही प्लेटफॉर्म पर जमा कर सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से, अब कोर्ट परिसर में पार्किंग के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा, जिसकी स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकेगी। साथ ही, नियमों का उल्लंघन होने पर शिकायत भी ऑनलाइन दर्ज की जा सकेगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे वह जज हो, वकील या आम नागरिक। इसी कारण से नई प्रवेश व्यवस्था और पार्किंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है।











