सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से संबंधित मुद्दे उठाए गए थे। इस दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उन ट्रिब्यूनल का कार्यकाल अब समीक्षा का समय है, जिन्होंने इन मामलों को सुना था।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि इन ट्रिब्यूनल का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, तो उनके कार्यशैली में बदलाव किया जा सकता है। चुनाव आयोग से इन ट्रिब्यूनल के कार्यों का विस्तृत विवरण मांगा गया है, और अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।
ट्रिब्यूनल की प्रभावशीलता और कार्यप्रणाली पर विचार
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक कितने मामलों का निपटारा हुआ है, यह देखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान गति से मामलों का निपटारा होता रहा तो अगला चुनाव भी इन अपीलों की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आ जाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे संबंधित डेटा कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे।
जस्टिस बागची ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी और कहा कि केवल अपील दाखिल कर देना राहत नहीं है। ट्रिब्यूनल बनाने वालों को यह भी देखना चाहिए कि कुल कितने मामले सुने गए, कितने निपटारे हुए और हर दिन कितने नए मामले आते हैं।
मामलों की धीमी गति और दूरदराज के इलाकों की चुनौतियां
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मामलों के निपटारे की रफ्तार पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबित मामलों के कारण उनके क्लाइंट को राशन जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस पर जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या वोटर लिस्ट से नाम हटने के आधार पर राशन देना मना किया जा सकता है, और इसे हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
अंत में, कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह इन ट्रिब्यूनल में आए मामलों का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करे। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, ताकि इन मुद्दों का समाधान निकाला जा सके।










