भारत के छोटे हथियार निर्माण उद्योग की गंभीर स्थिति
देश की सुरक्षा से जुड़े हथियारों के उत्पादन में चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। संसद की स्थायी समिति ने भारत के छोटे हथियार कारखानों की खराब स्थिति पर कठोर रुख अपनाया है। इन फैक्ट्रियों को पिछले कुछ वर्षों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसकी राशि 600 करोड़ रुपये से अधिक है। उत्पादन की क्षमता का एक बड़ा हिस्सा बिना उपयोग के ही खड़ा है, जिससे देश की रक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
रिपोर्ट में खुलासे: उत्पादन और वित्तीय संकट
यह रिपोर्ट एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) के बारे में है, जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक सरकारी कंपनी (DPSU) है। यह देश में छोटे हथियारों के निर्माण और संचालन का कार्य संभालती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2019-20 के बीच सेना की मांग बहुत कम रही, और इन फैक्ट्रियों की हिस्सेदारी महज 10 प्रतिशत ही रही। इन कारखानों को मुख्य रूप से गृह मंत्रालय (MHA) के ऑर्डर्स पर निर्भर रहना पड़ा, जो उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
आर्थिक और तकनीकी चुनौतियां, सुधार के सुझाव
संसद समिति ने बताया कि इन फैक्ट्रियों का वित्तीय हालात बहुत खराब हो चुका है। 2015 से 2020 के बीच इन तीनों फैक्ट्रियों को कुल मिलाकर 366 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक भी इनका नुकसान 234 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। समस्या यह है कि उत्पादन की लागत बहुत अधिक है, जबकि बाजार में बिक्री मूल्य उससे कम तय किया जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि लागत कम करने के लिए निजी डिफेंस कंपनियों से मुकाबला किया जाए और नागरिक बाजार के लिए नई उत्पादों जैसे शिकारी और खेलकूद राइफलें तथा गैर-घातक उपकरण बनाए जाएं।
संसद समिति ने हथियारों की गुणवत्ता पर भी चिंता जताई है। जांच में पाया गया कि फाइनल परीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां मिली हैं, जैसे बैरल बोर में चिप-ऑफ और फायरिंग की गति में कमी। इसलिए, समिति ने निर्देश दिया है कि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त जांच हो, ताकि सैनिकों को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले हथियार मिल सकें।
अंत में, इन्वेंट्री प्रबंधन की स्थिति भी खराब है। 31 मार्च 2020 तक इन फैक्ट्रियों के पास 641 करोड़ रुपये का स्टॉक जमा था, जो कुल उत्पादन लागत का 72 प्रतिशत था। फंसे हुए सामान की मात्रा 56 प्रतिशत तक पहुंच गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि इन्वेंट्री का बेहतर प्रबंधन किया जाए, भविष्य की मांग का सही अनुमान लगाया जाए और समय-समय पर स्टॉक की जांच की जाए, ताकि अनावश्यक पैसा ब्लॉक न हो। साथ ही, समिति ने यह भी कहा है कि AWEIL अपने संसाधनों का 2 से 3 प्रतिशत हिस्सा अनुसंधान और विकास (R&D) पर खर्च कर रहा है, लेकिन सरकार को इस योजना के लिए अलग से बजट का प्रावधान करना चाहिए ताकि नई तकनीकों और हथियारों का विकास समय पर हो सके।










