आम आदमी पार्टी में टूट का संकेत मजबूत हो रहा है
आम आदमी पार्टी (AAP) में आंतरिक अस्थिरता और नेताओं का पार्टी छोड़ना अब नई बात नहीं रह गई है, लेकिन हाल ही में यह टूट पहली बार इतनी गंभीर रूप ले चुकी है। यह स्थिति इतनी खतरनाक नहीं है कि पार्टी पूरी तरह से बिखर जाए, लेकिन इसकी कमर जरूर टूट चुकी है। कई वरिष्ठ नेताओं ने एक साथ ही केजरीवाल का साथ छोड़ दिया है, जो राजनीतिक हलकों में चिंता का विषय बन गया है। खासतौर पर जब राज्यसभा के 10 सांसदों में से 7 का पार्टी छोड़ना कोई मामूली बात नहीं है।
पार्टी के अंदरूनी संकट और नेताओं का पलायन
पहले तो अरविंद केजरीवाल ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। शुरुआत में संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ ही पार्टी में असंतोष उभरने लगा था। उनके साथ ही कई अन्य नेताओं को भी हटा दिया गया या मजबूर होकर अपना रास्ता बदलना पड़ा। ऐसा प्रतीत होता है कि आम आदमी पार्टी की नियति में ही यह सब शामिल है, जैसे कि इसकी सियासी डीएनए में ही कोई खामी हो। कभी कुमार विश्वास, आशुतोष, आशीष खेतान और शाजिया इल्मी जैसे नेता पार्टी का समर्थन करते थे, लेकिन अब संजय सिंह को अकेले ही सब कुछ संभालना पड़ रहा है।
संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना और उसकी वजहें
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना इस समय की सबसे बड़ी खबर है। उन्होंने राघव चड्ढा और अशोक मित्तल जैसे नेताओं के साथ पार्टी छोड़ दी है। स्वाति मालीवाल पहले ही पार्टी छोड़ चुकी हैं। अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाया था, लेकिन अब दोनों भी बीजेपी (BJP) में शामिल हो रहे हैं।
संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) और छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी थे। उन्होंने पंजाब के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और सरकार बनने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब संदीप पाठक ही उनके मुख्य संपर्क और सलाहकार थे। जेल में उनके मिलने की सूची में उनका नाम चौथे नंबर पर था, और उन्होंने कई बार जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की।
संदीप पाठक का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था, और उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। 2016 में वह दिल्ली आईआईटी (Indian Institute of Technology) में असिस्टेंट प्रोफेसर बने, लेकिन जल्द ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल के संपर्क में आकर राजनीति में कदम रखा। पंजाब में पार्टी की पहली हार के बाद भी उनका भरोसा पार्टी पर बना रहा। उन्होंने पंजाब में सर्वे किया और चुनाव में सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
2022 के पंजाब चुनाव में पार्टी की जीत के बाद संदीप पाठक को राज्यसभा भेजा गया। उस समय जब पार्टी के कई नेता जेल में थे, तो उन्होंने ही पार्टी का नेतृत्व संभाला। उनके पास संगठन का जिम्मा भी था, और वह छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी थे। अब वह राघव चड्ढा के साथ बीजेपी (BJP) में शामिल हो चुके हैं।











