गणतंत्र दिवस पर पहली बार सेना के साइलेंट वॉरियर्स का प्रदर्शन
इस वर्ष का गणतंत्र दिवस समारोह विशेष रूप से रोमांचक होने जा रहा है, क्योंकि पहली बार सेना के साइलेंट वॉरियर्स परेड में दिखाई देंगे। इस बार कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के पशु दस्ते भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। यह आयोजन इस तरह का पहला मौका है जब इन पशु दस्तों को इतनी बड़ी और संगठित रूप में परेड में शामिल किया जाएगा।
भारतीय सेना का विशेष पशु दस्ते और नई तकनीक का प्रयोग
इस विशेष दस्ते में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार ज़ांस्कर पोनी, चार शिकारी पक्षी जैसे चील, साथ ही भारतीय नस्ल के दस सेना के कुत्ते और छह पारंपरिक सैन्य कुत्ते शामिल होंगे। भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) ने इन पक्षियों को खास ट्रेनिंग दी है, जिनके सिर पर कैमरे भी लगाए गए हैं। इन कैमरों की मदद से ये पक्षी दुश्मन के छोटे ड्रोन को हवा में पकड़ने और गिराने में सक्षम होंगे।
भारतीय नस्ल के कुत्तों का सेना में प्रवेश और परेड का आकर्षण
आम तौर पर सेना विदेशी नस्ल के कुत्तों को प्रशिक्षण देकर उनका उपयोग करती रही है, लेकिन इस बार भारतीय नस्ल के कुत्तों को भी शामिल किया गया है। इनमें मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पी पराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी नस्लें शामिल हैं। इन कुत्तों को आरवीसी (रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर) में प्रशिक्षित किया गया है और सेना के डॉग ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये कुत्ते विस्फोटक और नशीले पदार्थों की पहचान करने वाले डिटेक्शन कुत्ते हैं, साथ ही आतंकवादियों या दुश्मनों पर हमला करने में भी सक्षम हैं।
गणतंत्र दिवस पर परेड में कुल 6050 जवान भाग लेंगे, जिनमें स्कॉट्स बटालियन की सब-जीरो यूनिफॉर्म में मार्च करने वाली टुकड़ी भी शामिल है। यह टुकड़ी कठोर ठंड और ऊंचाई वाले इलाकों में अपने अनुशासन और लचीलापन का प्रदर्शन करेगी। इस परेड का नेतृत्व फिर से लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार करेंगे। पहली बार परेड में भैरव, शक्तिबान, यूजीवी और लद्दाख स्काउट्स भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा पतंग, ज़ांस्कर टट्टू और बैक्टेयन ऊंट भी पहली बार परेड का हिस्सा बनेंगे।











