संसद का बजट सत्र शुरू, राष्ट्रपति मुर्मू का विकास और विरासत पर संदेश
बुधवार से संसद का वार्षिक बजट सत्र शुरू हो गया है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण के दौरान देश की विरासत और विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जो देश की आर्थिक दिशा तय करेगा। इस बीच विपक्षी दलों ने मनरेगा, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है।
राष्ट्रपति का संदेश और संसद की गतिविधियां
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में कहा कि जब देश अपने पूर्वजों के योगदान को याद करता है, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। यह प्रेरणा भारत के तेज़ विकास और समृद्ध विरासत की ओर हमारी यात्रा को और मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है, जिसे देशवासी श्रद्धा और सम्मान के साथ मना रहे हैं। राष्ट्रपति ने संसद के सदस्यों को इस अवसर पर बधाई दी और वंदे मातरम् पर चर्चा को देश की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला बताया।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संसद पहुंचे, जहां उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं, आर्थिक नीतियों और आगामी योजनाओं का संकेत दिया। यह सत्र दो चरणों में चलेगा, जिसमें कुल 30 बैठकें होंगी। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी, जो देश की आर्थिक योजनाओं का मार्गदर्शन करेगा।
सत्र की रणनीति और विपक्ष की योजनाएं
बजट सत्र के सफल संचालन के लिए विपक्षी पार्टियों ने आज सुबह ही रणनीति बनाने के लिए बैठक की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सदनों के सुचारू संचालन पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में अपनी संसदीय रणनीति समूह की बैठक की, जिसमें मनरेगा, पर्यावरणीय मुद्दे और विशेष संशोधन (SIR) जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई।
बजट सत्र की रूपरेखा लंबी और जटिल है। पहले चरण में 13 फरवरी तक राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा होगी। इसके बाद एक ब्रेक लिया जाएगा, और फिर 9 मार्च से सदन की कार्यवाही पुनः शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान विपक्षी दल सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें मनरेगा, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, विदेश नीति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
सत्र शुरू होने से एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री और विपक्ष के नेता मौजूद रहे। विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए खरगे ने भी एक अलग बैठक बुलाई है, ताकि सदन में सरकार के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाई जा सके।











