केरल की परंपरागत ओणम थाली का अनूठा अनुभव
ओणम त्योहार के दौरान दिल्ली में भी केरल की खास परंपरा का अनुभव हुआ। यहाँ पर परोसी गई साध्या की थाली में 15 से 17 विविध व्यंजन शामिल थे, जो केरल से मंगाए गए केले के पत्ते पर सजाए गए थे। इस आयोजन में लगभग 700 लोगों के लिए टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी, जहां हर व्यंजन को परंपरागत तरीके से परोसा गया। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक समारोह था, जिसमें हर व्यंजन का अपना अलग महत्व और परंपरा थी।
ओणम की खास थाली में शामिल विविध व्यंजन
इस खास थाली में मुख्य रूप से माट्टा राइस, परिप्पु करी (दाल), सांभर, रसम, अवियल, ओलन, कालन, एरिसेरी, थोरन, पचड़ी या खिचड़ी, पुलिस्सेरी, इंजि पुली, अचार, केले के चिप्स, शर्करा वरट्टी, पापड़म और दो प्रकार की खीरें शामिल थीं। इन व्यंजनों का संयोजन न केवल स्वादिष्ट था, बल्कि यह परंपरागत केरल भोजन का प्रतीक भी था। इन व्यंजनों को परोसने में लगभग 10 से 15 मिनट का समय लगा, और हर राउंड में 500 से 700 लोग भोजन कर रहे थे। इस प्रक्रिया में ताजगी, भाप और नारियल-तेल की खुशबू का मेल वातावरण को और भी आकर्षक बना रहा था।
खास अनुभव और स्वाद का मेल
भोजन की शुरुआत में ही माट्टा राइस और सांभर से की गई, जो मुंह में घुलने वाले थे। इसके बाद इंजि पुली, यानी अदरक और गुड़ की तीखी-मीठी चटनी का स्वाद लिया गया, जिसने जायके को और भी जीवंत बना दिया। बीच में ही चने की दाल की खीर का स्वाद भी लिया गया, जो गाढ़ी और सुगंधित थी। चावल की खीर भी अपने आप में अनूठी थी, जो नरम और हल्की थी, मानो गले से नीचे उतरना ही नहीं चाहती थी। केले के पत्ते पर परोसे गए पापड़म और केले के चिप्स का कुरकुरापन भी इस अनुभव को यादगार बना गया। इस पूरे आयोजन में भोजन और संस्कृति का मेल इतना सजीव था कि दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं लग रहे थे।











