सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद कासिफ को जमानत दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के करीबी होने का दावा कर लोगों से पैसे वसूलने वाले मोहम्मद कासिफ को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने लगभग तीन वर्षों से जेल में बंद इस आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
कासिफ पर मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला गौतम बुद्ध नगर के सूरजपुर थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल 2023 में ECIR दर्ज की थी। FIR में कासिफ पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट से संबंधित आरोप लगाए गए थे।
जांच और कोर्ट का फैसला
25 मई 2023 को उसे हिरासत में लिया गया था, और तब से वह जेल में था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कासिफ की जमानत याचिका खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामले की सुनवाई में कोई अनावश्यक देरी नहीं हुई है, और यह भी कि देरी आरोपी की ओर से दाखिल की गई विभिन्न अर्जियों के कारण हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान यह भी ध्यान दिया कि मोहम्मद कासिफ लगभग तीन साल से जेल में बंद है। कोर्ट ने कहा कि मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये बताई गई है। इन परिस्थितियों में, आरोपी को जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
आरोपी की जमानत शर्तें और आरोप
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मोहम्मद कासिफ जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है या जांच और ट्रायल में सहयोग नहीं करता है, तो ED ट्रायल कोर्ट में उसकी जमानत रद्द करने की अर्जी दाखिल कर सकती है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कासिफ सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों की मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट करता था, जिससे वह खुद को बड़े नेताओं का करीबी बताने का प्रयास करता था।
ईडी का दावा है कि इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर वह लोगों से सरकारी नौकरी, ठेके और विभागीय काम के नाम पर पैसे वसूलता था। छापेमारी के दौरान उसके ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बरामद हुई, जो संभवतः अपराध से अर्जित धन हो सकती है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोहम्मद कासिफ को जमानत मिल जाएगी, जबकि मामले की जांच और ट्रायल जारी रहेगा।











