लाहौर में आतंकवादी गतिविधियों का नया मोड़ सामने आया
लाहौर में एक चौंकाने वाली घटना में लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का एक बड़ा और संदिग्ध गतिविधि मॉड्यूल उजागर हुआ है। इस आतंकी संगठन ने नई पीढ़ी के जिहादियों को तैयार करने के लिए एक अभियान शुरू किया है, जिसमें उसका राजनीतिक हिस्सा पाकिस्तान मुस्लिम लीग (MML) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आयोजन चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है, लेकिन मंच पर मौजूद चेहरे इस बात का संकेत देते हैं कि आतंकवाद को फिर से जीवित करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
पाकिस्तान में आतंक की नई रणनीति का खुलासा
लाहौर में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन प्रमुख और कुख्यात आतंकवादी चेहरे एक साथ नजर आए। इनमें हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा सईद, पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी, और अमेरिकी प्रतिबंधित आतंकी मुजम्मिल इकबाल हाशिमी शामिल हैं। इन तीनों का एक मंच पर होना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान में आतंक को फिर से मजबूत करने की योजना चल रही है। यह संकेत स्पष्ट है कि युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने के लिए राजनीतिक दल का मुखौटा इस्तेमाल किया जा रहा है।
आतंकवाद को राजनीतिक मंच से बढ़ावा देने की कोशिशें
पाकिस्तान में फिर से लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) की सक्रियता बढ़ रही है, और 2 नवंबर को एक बड़ी रैली की तैयारी चल रही है। वहीं, मरकजी मुस्लिम लीग ने दावा किया कि लाहौर की 16 यूनियन काउंसिल में हुए इंट्रा-पार्टी चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हुए। इन चुनावों में 39 उम्मीदवारों ने भाग लिया और 16 अध्यक्ष चुने गए। पार्टी इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, लेकिन मंच पर मौजूद आतंकवादी चेहरों की उपस्थिति इस दावे को कमजोर कर रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान फिर से राजनीतिक मंच का सहारा लेकर नई आतंकवादी फौज खड़ी करने की योजना बना रहा है।









