दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का बढ़ता प्रभाव और धार्मिक रंग
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन दिन-ब-दिन अधिक व्यापक होता जा रहा है। इस आंदोलन में अब धार्मिक तत्व भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। कुछ लोग धार्मिक नारे लगा रहे हैं, तो वहीं कुछ निहंग (Nihang) योद्धा हवा में अपने हथियार लहराते नजर आ रहे हैं। इस तरह की घटनाओं ने इस आंदोलन के राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को जटिल बना दिया है, जिससे इसके हाईजैक होने का खतरा भी बढ़ गया है।
मूल मुद्दों से भटकाव और आंदोलन का राजनीतिकरण
अगर कोई व्यक्ति बिना इस बात को जाने जंतर-मंतर पहुंचे कि यह प्रदर्शन क्यों हो रहा है, तो उसे समझना मुश्किल होगा कि यह आंदोलन NEET-UG (National Eligibility cum Entrance Test) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था। बुधवार रात करीब 10:30 बजे लाउडस्पीकर से एक आवाज गूंजती है-“मुसलमान जय श्री राम नहीं बोलते, भारत माता की जय नहीं बोलते…”। कुछ ही पलों में भीड़ के कुछ हिस्से इन नारों को दोहराने लगते हैं।
धार्मिक नारों और हिंसक झड़पों का दौर
कुछ देर बाद, लाउडस्पीकर से ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे एक साथ लगने लगते हैं। सैकड़ों लोग इस दृश्य को देख रहे थे, कुछ नारों में भाग ले रहे थे, तो कुछ अपने मोबाइल कैमरों में इसे रिकॉर्ड कर रहे थे। जंतर-मंतर से महज कुछ मीटर दूर टॉल्स्टॉय मार्ग पर, सिख योद्धाओं के समूह निहंग तलवारें, कृपाण और लंबे भाले लेकर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के सामने खड़े नजर आए।
सोनम वांगचुक के आंदोलन से हटने के बाद माहौल में बदलाव आया। 6 जून को इस आंदोलन की शुरुआत करने वाले अभिजीत दीपके ने इसे शिक्षा सुधार और सरकार की जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्रित किया था। लेकिन 18 जुलाई को वांगचुक को जंतर-मंतर से हटा दिया गया और अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई और आंसू गैस के प्रयोग ने प्रदर्शन स्थल का माहौल पूरी तरह बदल दिया। हजारों लोग गुस्से में जंतर-मंतर पहुंचने लगे और भीड़ में इजाफा हुआ।
अब जंतर-मंतर पर मुख्य मंच से दूर कई गुट अपने-अपने राग अलापते और धार्मिक-राजनीतिक बहसें करते नजर आते हैं। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संवाद की कमी के कारण शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन बाहरी तत्वों के हेरफेर का शिकार हो रहा है। यह विरोध अब पूरे देश में फैल चुका है।
बुधवार रात को एक यूट्यूबर के साथ मारपीट की घटना हुई, और गुरुवार को प्रदर्शनकारियों और निहंगों के बीच झड़पें देखने को मिलीं। साथ ही, ऑन-ड्यूटी दिल्ली पुलिस और आरएएफ जवानों के साथ बदसलूकी के मामले भी सामने आए हैं।
सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ते सवाल
बढ़ती भीड़ के बीच जंतर-मंतर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। एक युवती ने देर रात यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने आरोपी की पिटाई कर उसे भगाया, लेकिन पुलिस के हवाले नहीं किया।
इंटरनेट सेवाओं के बंद होने से आयोजकों और समर्थकों का नियंत्रण कमजोर पड़ता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन अपने मूल मुद्दों पर टिके रह पाएगा या फिर यह पूरी तरह भटक जाएगा।









