विभाजन का इतिहास और उसकी पीड़ा का स्मरण
विभाजन केवल सीमाओं का निर्धारण करने का एक सामान्य कार्य नहीं था, बल्कि इसने करोड़ों लोगों को उनके घर, समुदाय और यादों से अलग कर दिया। दिल्ली के एलजी (Lieutenant Governor) सरदार तरनजीत सिंह संधू ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इस पीड़ा को साझा किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोग अपने घर छोड़कर नए स्थानों पर बसने को मजबूर हुए, और इस प्रक्रिया में उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
विभाजन स्मृति दिवस का आयोजन और शरणार्थियों का सम्मान
79वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के पार्टिशन म्यूजियम एंड कल्चरल हब में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन के बाद अपने जीवन को पुनः स्थापित करने वाले शरणार्थियों के संघर्ष और योगदान को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सहयोग से हुआ, जिसमें 1947 के विभाजन के पीड़ितों को याद किया गया। हालांकि दिल्ली के एलजी इस समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपना संदेश जरूर भेजा।
विभाजन की यादें और नई पीढ़ियों के लिए संदेश
सरकार और सांस्कृतिक संस्थान इस ऐतिहासिक घटना की यादों को संरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। दिल्ली के लाजपत नगर, पंजाबी बाग, मॉडल टाउन और खान मार्केट जैसे इलाकों में आज भी विभाजन की छाप दिखाई देती है। विस्थापित परिवार कम संसाधनों के साथ दिल्ली आए, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी फिर से खड़ी की और देश के निर्माण में अपना योगदान दिया।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी, जो IGNCA के सदस्य सचिव हैं, ने कहा कि संस्कृति को संरक्षित करने के लिए विभाजन की पीड़ा और कहानियों को भी सुरक्षित रखना जरूरी है। ये कहानियां सिर्फ इतिहास की किताबों में नहीं हैं, बल्कि परिवारों की तस्वीरों, दस्तावेजों और निजी वस्तुओं में भी मौजूद हैं। इस कार्यक्रम में विभाजन के प्रत्यक्षदर्शी और उनके परिवार भी शामिल हुए। इसके बाद एक म्यूजियम टूर का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन से जुड़ी व्यक्तिगत वस्तुएं, तस्वीरें और कहानियां दिखाई गईं।
विभाजन स्मृति को जीवंत बनाने के लिए मूर्तियों का निर्माण
पार्टिशन म्यूजियम की संस्थापक और चेयरपर्सन किश्वर देसाई ने एक नए प्रोजेक्ट की घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारत की आजादी और विभाजन की 80वीं वर्षगांठ पर, विभिन्न शहरों में सरकारों और युवा कलाकारों के सहयोग से नई मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। इन मूर्तियों का उद्देश्य विभाजन के शरणार्थियों की पीड़ा और संघर्ष की कहानियों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना है।
दिल्ली में लाजपत नगर, फ्रेंड्स कॉलोनी, खान मार्केट और किंग्सवे कैंप जैसे प्रमुख स्थानों पर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मूर्तियां लगाई जाएंगी। इसके अलावा अमृतसर और वाघा बॉर्डर पर भी विभाजन से जुड़ी दृश्यावलियों को स्थापित किया जाएगा। इस पहल का मकसद उन पीड़ितों की कहानियों को नई पीढ़ियों तक पहुंचाना है, ताकि वे विभाजन की त्रासदियों और संघर्षों को समझ सकें।











