यमुना किनारे बसे यमुना बाजार कॉलोनी में बेघर होने का खतरा
दिल्ली के निगम बोध घाट के पास यमुना नदी के किनारे स्थित यमुना बाजार कॉलोनी के सैकड़ों परिवार अब अपने घरों से बेघर होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। दिल्ली सरकार ने इस कॉलोनी को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिसमें इलाके को ‘O-Zone’ यानी यमुना फ्लडप्लेन क्षेत्र घोषित किया गया है। सरकार ने इन परिवारों को 15 दिनों के भीतर अपने मकान खाली करने का निर्देश दिया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रह रहे परिवारों का विरोध
सरकारी नोटिस के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 310 परिवार रहते हैं। प्रशासन का तर्क है कि यह इलाका बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आता है और यहां कोई भी स्थायी निर्माण नियमों का उल्लंघन है। हर साल मानसून और यमुना के जलस्तर में वृद्धि के दौरान यह इलाका सबसे पहले जलभराव और बाढ़ की चपेट में आ जाता है, जिससे निवासियों की जान और संपत्ति दोनों खतरे में पड़ जाते हैं।
स्थानीय लोगों का सरकार के फैसले पर विरोध और सवाल
स्थानीय निवासी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। सुनील शर्मा जैसे लोगों का कहना है कि यदि सरकार ‘O-Zone’ का हवाला दे रही है, तो यमुना के किनारे ओखला तिब्बत मार्केट जैसे इलाकों में बसे लोगों को क्यों नहीं हटाया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यमुना बाजार के पास ही एक प्राइवेट अस्पताल है, जो हर साल बाढ़ में डूब जाता है, फिर उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन वर्षों से उनके परिवारों का घर रही है, और उन्हें हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी मिला हुआ है। वे यह भी आरोप लगाते हैं कि जब मामला अदालत में लंबित है और उन्हें राहत मिली है, तो सरकार बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें क्यों बेदखल कर रही है।
कई परिवार दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं, और उनके बच्चे यहां पढ़ते हैं, रोजगार करते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बिताते हैं। अचानक नोटिस मिलने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। महिलाएं और बुजुर्ग कहते हैं कि उनके पास रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। वे सरकार से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं और कहते हैं कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना अनुचित होगा।
अभी भी यमुना बाजार कॉलोनी के 310 परिवारों की नजर अदालत और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है, और यह मामला आने वाले दिनों में और भी गरम हो सकता है।











