एसेट रिकवरी की चुनौतियों और समाधान पर चर्चा
नई दिल्ली में आयोजित एसेट रिकवरी इंटरजेंसी नेटवर्क (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक बैठक में ED (Enforcement Directorate) के प्रमुख ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब करोड़ों का काला धन पकड़ा जाता है, तो क्या इसका कोई लाभ तब होता है जब वह रकम पीड़ितों तक पहुंच ही नहीं पाती? इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था अपराध से जुड़े अवैध धन की खोज से लेकर उसे वापस करने तक के पूरे प्रक्रिया का विश्लेषण करना।
ED के डायरेक्टर राहुल नवीन ने स्पष्ट किया कि केवल संपत्ति जब्त करना ही सफलता का मापदंड नहीं है। असली सफलता तब मानी जाती है जब जब्त की गई रकम और संपत्ति पीड़ितों को या फिर सरकारी कोष में वापस मिलती है। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया एक सतत चेन है, जिसमें पहले अवैध संपत्ति का पता लगाना, फिर कोर्ट से जब्त करने का आदेश लेना, उसके बाद उसकी देखभाल करना और अंत में उसे वापस लौटाना शामिल है।
संपत्ति जब्ती और पीड़ितों का अधिकार
राहुल नवीन ने यह भी कहा कि जनता कानून व्यवस्था का मूल्यांकन इस आधार पर करती है कि सरकार ने कितनी संपत्तियों को जब्त किया है या लौटाया है। पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलना, सरकारी खजाने में जमा करना और जब्त संपत्तियों का सामाजिक उपयोग ही असली उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने एक गंभीर समस्या की ओर भी संकेत किया कि जांच एजेंसियां अक्सर केवल संपत्ति की खोज में लगी रहती हैं, जबकि कोर्ट के आदेश पर ध्यान कम देती हैं। इससे पीड़ितों को न्याय का इंतजार लंबा हो जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता
बैठक में क्रिप्टोकरेंसी पर भी चर्चा हुई, जहां बताया गया कि अपराधी वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कर तुरंत पैसा देश से बाहर भेज देते हैं। इसे पकड़ने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स से त्वरित संपर्क, ब्लॉकचेन एनालिटिक्स और विदेशी एजेंसियों की मदद जरूरी है। इंटरपोल (Interpol) के सिल्वर नोटिस और सीमा पार संपत्ति की ट्रेसिंग पर भी विचार-विमर्श हुआ। राहुल नवीन ने कहा कि एजेंसियों के बीच अनौपचारिक बातचीत तभी प्रभावी होगी जब इसे औपचारिक कानूनी प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा बिना सजा के संपत्ति जब्ती के मामलों पर भी चर्चा हुई। यदि संपत्ति की देखभाल की योजना पहले से न बनाई जाए, तो उसकी कीमत घटने का खतरा रहता है। भारत ने पीड़ितों को पैसा लौटाने के अपने मॉडल भी साझा किए, जिसमें सीधे पीड़ितों को पैसा देना, सरकारी खजाने में जमा करना या फिर जब्त संपत्तियों का सार्वजनिक उपयोग शामिल है। राहुल नवीन ने बताया कि FATF (Financial Action Task Force) के नए नियमों में किए गए बदलाव आने वाले समय में देशों के मूल्यांकन को प्रभावित करेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की बैठकें तब अधिक प्रभावी होंगी जब देश एक-दूसरे से मदद मांगेगा और पहले से स्थापित संबंधों का लाभ उठाकर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। इस तरह की पहल से अपराध से जुड़े धन की रिकवरी और पीड़ितों को न्याय दिलाने का रास्ता आसान होगा।








