दिल्ली के विवेक विहार में भीषण आग से हड़कंप मच गया
दिल्ली के विवेक विहार क्षेत्र में रविवार तड़के एक आवासीय इमारत में अचानक आग लगने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस आगजनी में नौ लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। दमकल विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर आग पर नियंत्रण पाया है, लेकिन अभी भी कूलिंग और सर्च ऑपरेशन जारी है। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
आग लगने का कारण और बचाव कार्य की पूरी प्रक्रिया
दमकल विभाग के अनुसार, फायर कंट्रोल रूम को सुबह लगभग 3:47 बजे आग लगने की सूचना मिली। तत्परता दिखाते हुए 14 फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। दमकलकर्मियों ने तुरंत ही आग बुझाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का रेस्क्यू अभियान शुरू किया। इस दौरान, धुएं के बीच से 12 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में मृतकों की संख्या आठ बताई गई थी, जो अब बढ़कर नौ हो गई है। गंभीर रूप से झुलसे चार लोगों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये तथा घायलों को पचास हजार रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।
हादसे का विस्तृत घटनाक्रम और सुरक्षा खामियां
रविवार सुबह विवेक विहार की बिल्डिंग नंबर B12 में रहने वाले आठ परिवार अपने घरों में सो रहे थे। लगभग 3:40 बजे अचानक तेज शोर-शराबे के बीच लोग जाग गए। कुछ ही मिनटों बाद फायर डिपार्टमेंट को सूचित किया गया कि बिल्डिंग में आग लगी है और लोग फंसे हुए हैं। 3:55 बजे मौके पर पहुंची एम्बुलेंस और 4:05 बजे फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। यह इमारत लगभग 800 वर्ग गज में फैली थी, जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग और ऊपर चार मंजिलें थीं। हर मंजिल पर दो फ्लैट बने थे, जो एक सामान्य सीढ़ी और लिफ्ट से जुड़े थे। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आग दूसरी मंजिल पर लगे आउटडोर यूनिट से शुरू हुई। शॉर्ट सर्किट के कारण आग तेजी से फैल गई, खासकर लकड़ी के उपयोग के कारण। इलेक्ट्रिक लॉक की वजह से कई लोग अपने कमरों से बाहर नहीं निकल सके। ऊपरी मंजिल पर रहने वाले तीन लोग छत की तरफ भागे, लेकिन वहां भी बंद दरवाजा मिला, जिससे वे बेहोश होकर मौत के मुंह में चले गए। पहली मंजिल से भी एक शव बरामद हुआ, जहां भी दरवाजा जाम था। दमकल कर्मियों के लिए अंदर पहुंचना अत्यंत कठिन था, क्योंकि आग पीछे से शुरू होकर ऊपर-नीचे हर मंजिल तक फैल गई थी। आसपास की इमारतें भी बहुत करीब थीं, और कई जगह लोहे की ग्रिल से बंद थीं, जिससे रेस्क्यू में बाधा आई। इस हादसे ने रिहायशी इमारतों में सुरक्षा मानकों की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अभी भी राहत और बचाव कार्य जारी है।










