सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण का अहम फैसला
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने और वाहनों की उम्र सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस फैसले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने पुराने निर्देश में संशोधन करते हुए बीएस-4 और उससे बेहतर तकनीक वाले इंजनों वाली गाड़ियों को दस और पंद्रह साल की उम्र सीमा से मुक्त कर दिया।
यह निर्णय प्रदूषण की वर्तमान स्थिति और उन्नत इंजन तकनीक को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अब इन वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र और पीयूसी (Pollution Under Control Certificate) के आधार पर सड़क पर चलने की अनुमति मिलेगी। यह बदलाव राजधानी के वाहन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो रहा है।
आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियों को मिलेगी नई छूट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन कर यह स्पष्ट किया कि बीएस-4 और उससे बेहतर इंजन वाली गाड़ियों पर अब उम्र की सीमा का कोई बंधन नहीं रहेगा। डीजल वाहनों के लिए दस साल और पेट्रोल वाहनों के लिए पंद्रह साल की उम्र सीमा लागू नहीं होगी। इन वाहनों को केवल अपने पीयूसी और फिटनेस सर्टिफिकेट के आधार पर सड़क पर चलने की अनुमति दी जाएगी।
इस फैसले से राजधानी में चलने वाली आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियों को अधिक स्वतंत्रता मिली है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ वाहन मालिकों को भी राहत मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पर्यावरण संरक्षण के साथ ही वाहन उद्योग में नई दिशा दिखाने का प्रयास है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई दिशा में कदम
यह निर्णय दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों को मजबूत करता है। अब वाहन मालिक अपने वाहनों का फिटनेस और पीयूसी प्रमाणपत्र दिखाकर सड़क पर आसानी से चल सकेंगे। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि वाहन मालिकों को भी अनावश्यक उम्र सीमा से राहत मिलेगी।











