दिल्ली में स्पीड लिमिट का सही ज्ञान क्यों जरूरी है?
दिल्ली की सड़कों पर कई स्थानों पर स्पीड लिमिट के संकेतक दिखाई देते हैं, लेकिन अधिकांश अंदरूनी गलियों और कॉलोनियों में ये बोर्ड नजर नहीं आते हैं। इस कारण से वाहन चालक अक्सर अपनी समझ और अनुमान पर ही रफ्तार तय करते हैं। इसी बीच, लाखों लोग Google Maps या Apple Maps जैसे डिजिटल नेविगेशन ऐप्स का सहारा लेते हैं, ताकि यह जान सकें कि किसी सड़क पर कानूनी तौर पर कितनी रफ्तार से वाहन चलाना उचित है।
RTI के जवाब से खुलासा हुआ कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का डेटा सार्वजनिक नहीं
हाल ही में एक RTI (राइट टू इंफॉर्मेशन) आवेदन के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपनी आधिकारिक स्पीड लिमिट का डेटा Google Maps, Apple Maps या अन्य डिजिटल नेविगेशन प्लेटफॉर्म के साथ साझा नहीं करती। इसका अर्थ है कि यदि किसी सड़क पर स्पीड बोर्ड नहीं है, तो चालक अपने मोबाइल स्क्रीन पर दिख रही रफ्तार को ही मानक मानकर चल सकता है, जो कि ट्रैफिक विभाग के रिकॉर्ड से मेल खाता नहीं हो सकता।
क्या होता है यदि चालक सीमा से अधिक रफ्तार में चलता है?
यदि कोई वाहन चालक बिना स्पष्ट स्पीड बोर्ड के रफ्तार तय करता है और उसकी रफ्तार सीमा से अधिक हो जाती है, तो उसे चालान का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ट्रैफिक विभाग की ओर से आधिकारिक डेटा सार्वजनिक नहीं होने के कारण, चालक को यह पता नहीं होता कि उसकी रफ्तार सीमा के भीतर है या नहीं।
दिल्ली में स्पीड लिमिट कैसे निर्धारित और संशोधित की जाती है?
दिल्ली में स्पीड सीमा तय करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पास है। वर्तमान नियम 8 जून 2021 की अधिसूचना के आधार पर लागू हैं, जिनके अनुसार शहर की विभिन्न सड़कों और वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा निर्धारित की गई है। कार और टैक्सी के लिए यह सीमा 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि दोपहिया और छोटे वाहन अधिकतम 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकते हैं। बसों और ट्रकों के लिए अधिकतम सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा है। रिहायशी इलाकों और बाजारों में यह सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित है।
प्रमुख सड़कों पर वाहन चालकों के लिए निर्धारित गति सीमा
दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर वाहन चालकों के लिए तय गति सीमा इस प्रकार है: NH-48 (गुड़गांव रोड) पर परेड रोड से गुड़गांव सीमा तक 70 किलोमीटर प्रति घंटा, DND फ्लाईवे और मयूर विहार लिंक रोड पर भी यह सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। नोएडा टोल रोड पर सीधे हिस्से में 70 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि घुमावदार हिस्सों में यह सीमा घटकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाती है। रिंग रोड पर चांदगी राम अखाड़ा से आजादपुर तक, और आईएसबीटी, राजघाट, आईटीओ, AIIMS जैसे इलाकों में यह सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा है।
सड़क की चौड़ाई और चौराहों के आधार पर गति सीमा तय
सड़क की चौड़ाई, चौराहों की संख्या और रिहायशी इलाकों के आधार पर दिल्ली में गति सीमा निर्धारित की जाती है। हाईवे जैसी चौड़ी सड़कों पर अधिकतम गति सीमा अधिक रखी जाती है, जबकि घुमावदार या रिहायशी इलाकों में यह सीमा कम कर दी जाती है। जहां स्पीड बोर्ड नहीं हैं, वहां चालक अक्सर नेविगेशन ऐप्स पर निर्भर रहते हैं, जिनका डेटा ट्रैफिक विभाग से आधिकारिक रूप से जुड़ा नहीं है।
स्पीड लिमिट से अधिक रफ्तार पर चालान की सीमा
यह जानना जरूरी है कि दिल्ली में स्पीड लिमिट का बोर्ड चालान के लिए सटीक मानक नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, चालान से पहले 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है, जिसे ‘स्पीड कुशन’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि यदि किसी सड़क पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा है, तो आप 63 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पर भी बिना चालान के चल सकते हैं। इसी तरह, 70 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा पर यह सीमा 73.5 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाती है।
छूट सीमा पार करने पर क्या होता है?
यदि चालक इस 5 प्रतिशत की छूट सीमा से अधिक रफ्तार में चलता है, तो यह उल्लंघन माना जाएगा और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, 60 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा पर 63 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार को चालान से बचा जा सकता है, लेकिन यदि यह सीमा पार हो जाती है, तो चालान हो सकता है।
इस तरह, दिल्ली में सही स्पीड लिमिट का ज्ञान और उसका पालन करना वाहन चालकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि न केवल यातायात नियमों का सम्मान किया जा सके, बल्कि अनावश्यक चालान से भी बचा जा सके।









