दिल्ली में वायु गुणवत्ता में अस्थायी सुधार: बारिश का प्रभाव
दिल्ली में हाल ही में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 48 तक पहुंच गया, जो 2026 के पहले ‘अच्छे’ हवा वाले दिन के रूप में दर्ज हुआ। यह स्थिति सितंबर 2023 के बाद पहली बार देखने को मिली है। इस सुधार का मुख्य कारण भारी बारिश है, न कि सरकारी नीतियों का। बारिश की बूंदें प्रदूषक कणों को जमीन पर खींच लाती हैं, धूल को दबाती हैं और हवा में मौजूद प्रदूषण को फैलने से रोकती हैं।
बारिश और प्रदूषण नियंत्रण का संबंध
वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश की बूंदें हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों से टकराकर उन्हें जमीन पर गिरा देती हैं, जिसे गीला निक्षेपण कहा जाता है। साथ ही, बारिश सड़कों और निर्माण स्थलों की धूल को भी दबा देती है। इस हफ्ते दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र पर 24 घंटे में 72.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो इतनी अधिक थी कि वायु को साफ करने में मदद मिली।
मौसम परिवर्तन और प्रदूषण का पुनः बढ़ना
हालांकि, यह राहत स्थायी नहीं है। मानसून के समाप्त होने के बाद सर्दियों की शांत हवाएं और तापमान में बदलाव फिर से प्रदूषण को जमीन के पास जमा कर देंगे। ट्रैफिक, उद्योग और कचरा जलाने से होने वाला प्रदूषण अभी भी बना हुआ है, जिससे वायु गुणवत्ता फिर से खराब होने की संभावना है।









