दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के तहत बड़े पैमाने पर कदम उठाए हैं। पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिस्सा के नेतृत्व में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने हाल ही में 1756 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया। इस अभियान के दौरान 556 नोटिस जारी किए गए, साथ ही 7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अतिरिक्त, 48 निर्माण साइटों को धूल और कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने के कारण सील कर दिया गया है।
निर्माण स्थलों पर निगरानी और जुर्माने की कार्रवाई
पिछले दो दिनों में केवल 230 साइटों का निरीक्षण किया गया, जिसमें सरकारी और निजी संस्थान जैसे MCD (Municipal Corporation of Delhi), PWD (Public Works Department), DDA (Delhi Development Authority), DSIIDC (Delhi State Industrial Infrastructure Development Corporation) और DMRC (Delhi Metro Rail Corporation) शामिल हैं। इन निरीक्षणों में करीब एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह अभियान दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जारी है, जिसमें निर्माण और धूल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
गैर-कानूनी उद्योग और प्रदूषण से निपटने के कदम
मंत्री सिस्सा ने चेतावनी दी है कि अवैध उद्योग और निर्माण कार्य जो आबादी वाले इलाकों में प्रदूषण फैलाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। DPCC की टीमें इन अवैध यूनिटों की पहचान कर उन्हें बंद कर रही हैं। सरकार ने बताया कि इस वर्ष 42,000 से अधिक गड्ढे भरे गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। राजधानी में 350 नई मिस्ट स्प्रेइंग मशीनें, 100 मैकेनिकल रोड स्वीपर और 1,000 लीटर पिकर लगाए जा रहे हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या दिसंबर 2024 में 3.46 लाख से बढ़कर नवंबर 2025 में 4.54 लाख हो गई है। खुले बायोमास जलाने पर रोक लगाने के लिए 1823 एन्फोर्समेंट टीमें तैनात की गई हैं।
सर्दियों में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने 1407 RWAs (Resident Welfare Associations) में 3377 इलेक्ट्रिक हीटर वितरित किए हैं। पूरे शहर में कुल 10,000 हीटर पहुंचाने का लक्ष्य है ताकि लोग खुले में आग न जलाएं। सिस्सा ने कहा कि कॉन्ट्रैक्टर्स को हीटर प्रदान करना अनिवार्य है, यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। इसके अलावा, दिल्ली सरकार जल्द ही IIT दिल्ली और IIT मद्रास के साथ समझौता (MoU) करेगी ताकि प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके। इनोवेशन चैलेंज के तहत 278 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 200 तकनीकी जांच के लिए पास हो चुकी हैं।











