दिल्ली हाईकोर्ट ने वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुमति दी
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व जोनल डायरेक्टर और आईआरएस (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी। इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम फिर से शुरू करने का अधिकार दे दिया है।
2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़ी है यह कार्रवाई
यह मामला 2021 में चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस से संबंधित है। उस समय वानखेड़े की अगुवाई में हुई छापेमारी के बाद कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SET) का गठन किया गया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। इस केस ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और वानखेड़े की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे।
हाईकोर्ट का फैसला और आगे की प्रक्रिया
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने वानखेड़े की दलीलों से सहमति जताते हुए चार्ज मेमोरेंडम को रद्द कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है और ऐसा लगता है कि अधिकारी के खिलाफ कदम दुर्भावना से प्रेरित हैं।
हाईकोर्ट में केंद्र सरकार और CBIC ने तर्क दिया कि CAT ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। उनका कहना था कि आरोप पत्र जारी करने के शुरुआती चरण में ही ट्रिब्यूनल को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। केंद्र ने यह भी कहा कि विभागीय जांच एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे पूरा होने देना जरूरी है ताकि निष्पक्षता से तथ्यों की जांच हो सके।
अब दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद केंद्र सरकार वानखेड़े के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी। इससे स्पष्ट हो गया है कि मामले का अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा। यह फैसला वानखेड़े के लिए एक कानूनी झटका माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा, जो उनके करियर पर प्रभाव डाल सकती है।









