दिल्ली जिमखाना क्लब की बेदखली का मामला हाईकोर्ट में जारी
दिल्ली जिमखाना क्लब की बेदखली से जुड़ा विवाद अब उच्च न्यायालय में गहरा हो गया है। एस्टेट ऑफिसर 30 जुलाई को क्लब के सदस्यों और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की दलीलें सुनेंगे, जबकि इससे पहले 28 जुलाई को इस मामले की सुनवाई होगी। क्लब ने लीज समाप्त करने और बेदखली नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है।
28 जुलाई को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, अदालत ने मांगे जवाब
मंगलवार को विजय खुराना और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधि हाईकोर्ट में पहुंचे, लेकिन उन्होंने उस समय अपना पक्ष नहीं रखा। विजय खुराना ने बताया कि 28 जुलाई को इस मामले की सुनवाई निर्धारित है, जिसके बाद ही यह तय होगा कि एस्टेट ऑफिसर के समक्ष कौन-कौन से तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। सोमवार को न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने केंद्र सरकार से उन आवेदनों का जवाब मांगा है, जिनमें 29 जून के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि अगली सुनवाई के बाद ही एस्टेट ऑफिसर की सुनवाई हो। इसी कारण 30 जुलाई की नई तारीख तय की गई है।
आरोप और आदेशों का आधार: 22 मई का आदेश और लीज समाप्ति
यह विवाद मुख्य रूप से 22 मई को जारी उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज समाप्त कर दी गई थी। आदेश में क्लब को 27.3 एकड़ जमीन 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया गया था, जिसे सरकार ने रक्षा ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जारी किया था। हालांकि, 26 मई को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि वह 5 जून तक जबरन कब्जा नहीं लेगी और कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेगी। विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा है कि 29 जून का कारण बताओ नोटिस इस आधार पर जारी किया गया कि क्लब की लीज वैध रूप से समाप्त हो चुकी है, जबकि यह मुद्दा अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी मांग की है कि क्लब का वर्तमान संचालन और कब्जा यथावत बना रहे।









