दिल्ली में विशेष पुनरीक्षण अभियान से जुड़ी नई जानकारी
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कुल 31.63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। इस प्रक्रिया में, यदि मतदाता फॉर्म में कोई भी छोटी सी गलती, लापरवाही या चूक पाई जाती है, तो उसे सुधारने के लिए नोटिस जारी किया जाता है।
इसके अलावा, पुराने एसआईआर दस्तावेजों से मिलान या मैपिंग न हो पाने की स्थिति में भी मतदाताओं को नोटिस भेजकर सत्यापन कराया जाता है। अब इन नोटिस प्राप्त मतदाताओं को अपने दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत कर इन विसंगतियों का समाधान करना होगा, ताकि उनका और उनके बच्चों का रिकॉर्ड सही ढंग से दर्ज रहे।
मतदाता सूची में विसंगतियों का समाधान और नोटिस का महत्व
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार के अनुसार, ये नोटिस उन मतदाताओं को भेजे गए हैं जिनके नाम पिछली मतदाता सूची से लिंक नहीं हैं, यानी वे Unmapped हैं। इन फॉर्म में तार्किक विसंगतियों जैसे पिता-पुत्र के नाम में अंतर, उम्र में असंगति या अन्य जानकारी में मेल न खाने जैसी गलतियां पाई गई हैं। इन विसंगतियों का समाधान करने के लिए मतदाताओं को आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
वर्तमान में, लगभग 47.5 लाख नाम नई ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। प्रभावित मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन और सुनवाई के लिए विशेष मतदान केंद्रों पर शिविर लगाए गए हैं। इनमें से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी विसंगति के कारण नोटिस में आया था, लेकिन अब उनके फॉर्म का सत्यापन हो चुका है और उनका नाम अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।
प्रमुख नामों और विसंगतियों का विवरण
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार का पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण भी उन्हें नोटिस भेजा गया है। इसी तरह, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल का भी 2002 में हुए एसआईआर से संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। इसके अलावा, बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेवा और सुधांशु मित्तल के नाम में भी गड़बड़ी के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।










