कनॉट प्लेस को व्हीकल फ्री बनाने का प्रस्ताव विवाद का कारण बना
दिल्ली की प्रमुख व्यावसायिक जगह कनॉट प्लेस को पूरी तरह से वाहन मुक्त बनाने का सुझाव अब चर्चा का विषय बन गया है। न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) के चेयरपर्सन मनोज द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर इस प्रस्ताव को लेकर जनता से राय मांगी है, जिससे इस मुद्दे पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
प्रस्ताव के तहत इनर सर्कल को पेडेस्ट्रियन जोन बनाने का विचार
मनोज द्विवेदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूछा है कि क्या कनॉट प्लेस के इनर सर्कल को विदेशी शहरों या देश के प्रमुख मॉल रोड की तरह व्हीकल फ्री किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे लोग बिना ट्रैफिक की परेशानी के स्वतंत्र रूप से घूम सकेंगे। उन्होंने इस योजना के लिए मौसम के अनुसार शेड्यूल भी सुझाया है, जिसमें गर्मियों में शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक और सर्दियों में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक व्हीकल फ्री रहेगा। साथ ही वीकेंड के लिए अलग समय तय किया जाएगा।
व्यापारियों का विरोध और असली समस्या पर जोर
इस प्रस्ताव के सामने आते ही व्यापारियों की संस्था NDTA ने अपनी नाखुशी जाहिर की है। जॉइंट सेक्रेटरी अमित गुप्ता ने कहा कि इस योजना के बारे में व्यापारियों से कोई बातचीत नहीं हुई है और उन्हें सोशल मीडिया से ही इसकी जानकारी मिली है। उनका तर्क है कि कनॉट प्लेस का डिज़ाइन पहले से ही पैदल यात्रियों के अनुकूल है, जिसमें चौड़े कॉरिडोर, वॉकवे और पार्किंग लॉट शामिल हैं। उनका कहना है कि असली समस्या गाड़ियों की आवाजाही नहीं, बल्कि अवैध अतिक्रमण और गलत पार्किंग है। यदि प्रशासन इन अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करे, तो यातायात की समस्या स्वतः हल हो जाएगी।
व्यापारी यह भी मानते हैं कि कनॉट प्लेस की पहचान उसके ‘Park & Shop’ मॉडल पर टिकी है, जिसमें ग्राहक अपनी गाड़ी पार्क कर खरीदारी करते हैं। यदि गाड़ियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया, तो ग्राहक दूर पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से आकर दूसरे बाजारों का रुख करेंगे। उनका तर्क है कि दिल्ली का मौसम विदेशी शहरों जैसा नहीं है, और तेज गर्मी, धूल और प्रदूषण के बीच ग्राहक गाड़ियों को छोड़कर पैदल चलने में रुचि नहीं लेंगे।
अंत में, व्यापारियों का कहना है कि NDMC को पहले अवैध अतिक्रमण हटाने और पार्किंग व्यवस्था मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि व्यापार और शहर की पहचान दोनों सुरक्षित रह सकें।











