कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच रेलवे नेटवर्क का विस्तार
केंद्र सरकार ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण रेलवे परियोजना को मंजूरी दी है, जिसकी लागत लगभग 1264 करोड़ रुपये है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में लिया गया। इस परियोजना के अंतर्गत बल्लारी-गुंतकल रेलवे सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेल लाइनों का निर्माण किया जाएगा, ताकि यातायात की क्षमता में वृद्धि हो सके। सरकार का उद्देश्य माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना है, और इसे पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित किया गया है, जिसमें मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रोजेक्ट का क्षेत्रीय और आर्थिक प्रभाव
यह रेलवे परियोजना कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के तीन जिलों से होकर गुजरेगी, और इसके पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इस मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से करीब 99 गांवों की रेलवे कनेक्टिविटी में सुधार आएगा, जिनकी कुल आबादी लगभग सात लाख है। इससे न केवल यात्रियों को प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे बल्लारी किला और श्री कुमार स्वामी मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी, बल्कि माल ढुलाई भी अधिक प्रभावी होगी। इस मार्ग से आयरन ओर, डोलोमाइट, लाइमस्टोन, कोयला, खाद और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई की जाती है। अनुमान है कि इस नई लाइन की क्षमता बढ़ने से सालाना लगभग 16.22 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव होगी।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
सरकार का मानना है कि इस रेलवे विस्तार से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। इससे लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की आयात में कमी आएगी और करीब 6.67 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा। यह उत्सर्जन में कमी लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के बराबर है। रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, संचालन की दक्षता में सुधार होगा और रेल सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। साथ ही, इस परियोजना से भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी, जिससे यातायात का प्रवाह और भी बेहतर होगा।











