बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन जल्द संभव
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के लाखों निवासियों के लिए खुशखबरी है। करीब दस वर्षों से लंबित बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण कार्य अब पूरी तरह से पूरा हो चुका है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस परियोजना का कार्य समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर उद्घाटन की तिथि तय करने का अनुरोध किया है। उम्मीद है कि अगस्त माह में इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना जनता के लिए खोल दी जाएगी।
सड़क सुविधा से यातायात में आएगा सुधार और समय की बचत
यह एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू होते ही पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। मयूर विहार फेज-1 से लेकर एम्स, आईएनए, साउथ एक्सप्रेसवे और सरोजिनी नगर तक वाहन बिना ट्रैफिक सिग्नल के सीधे पहुंच सकेंगे। वर्तमान में इस मार्ग में यात्रा में 50 मिनट से एक घंटे का समय लगता है, लेकिन कॉरिडोर के खुलने के बाद यह दूरी महज 10 से 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि यातायात की भीड़ में भी कमी आएगी।
किस इलाकों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ और परियोजना का महत्व
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार, त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, दल्लूपुरा, वेस्ट विनोद नगर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को मिलेगा। वहीं दक्षिणी दिल्ली के एम्स, आईएनए, साउथ एक्सप्रेसवे, सरोजिनी नगर और रिंग रोड से जुड़े क्षेत्रों में भी आवागमन आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त एनएच-24, डीएनडी फ्लाईवे, सराय काले खां और रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।
बारापुला फेज-3 लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो पहले से मौजूद बारापुला कॉरिडोर को पूर्वी दिल्ली से जोड़ता है। यह दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है, क्योंकि इससे राजधानी के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
यह परियोजना 2014 में स्वीकृत हुई थी, और 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। शुरुआत में इसे 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, ठेकेदारों से विवाद, निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और कोविड महामारी के कारण काम में देरी हुई। इस वजह से परियोजना की लागत भी बढ़कर लगभग 1330 करोड़ रुपये हो गई, जबकि शुरू में इसकी लागत लगभग 964 करोड़ रुपये थी।
दिल्ली सरकार ने इस परियोजना में हुई देरी और अनियमितताओं की जांच एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) से कराई, जिसके बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई गई। अब यह कॉरिडोर पूरी तरह सिग्नल-फ्री होगा, जिससे वाहन बिना रुके चलते रहेंगे। इससे ईंधन की बचत होगी, यात्रा का समय कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही आश्रम से एम्स और सराय काले खां के आसपास रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम में भी राहत मिलेगी।











