स्लीपर बसों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई तेज
देशभर में स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर ‘आजतक’ द्वारा किए गए रियलिटी चेक का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। इस खबर के प्रसारित होने के तुरंत बाद ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों के परिवहन विभाग सक्रिय हो गए हैं। इन राज्यों में जगह-जगह छापेमारी, चालान काटने, बसों को सीज करने और जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं मध्य प्रदेश से भी प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
राज्य सरकारें कर रही सख्त कार्रवाई और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन रोकने का प्रयास
उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने ‘आजतक’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पूरी रिपोर्ट का अवलोकन किया है और इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग पहले भी लगातार कदम उठा रहा है, जिसमें बसों को सीज करना और रायबरेली, लखनऊ जैसे जिलों में एआरटीओ अधिकारियों को निलंबित करना शामिल है।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई बस सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही है, तो उसकी जांच कुछ ही दिनों में पूरी कर ली जाएगी और फिर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और ‘आजतक’ की रिपोर्ट को संज्ञान में लिया गया है।
पंजाब, राजस्थान और दिल्ली में हुई व्यापक छापेमारी और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
पंजाब के परिवहन मंत्री ललजीत सिंह भुल्लर ने भी स्लीपर बस रियलिटी चेक पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल के हादसों के बाद केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों के लिए कड़े नियम तय किए थे, जिनमें चार इमरजेंसी एग्जिट, दो फायर एक्सटिंग्विशर और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसे प्रावधान शामिल हैं। बावजूद इसके, कई बसें इन नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। भुल्लर ने निर्देश दिए हैं कि इन बसों की जांच की जाए, चालान काटे जाएं और यदि आवश्यक हो तो इन बसों को पूरी तरह बंद कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
राजस्थान में भी ‘आजतक’ की रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई हुई। जयपुर में परिवहन विभाग की टीम ने दिनभर छापेमारी कर दर्जनों बसों के चालान काटे और कई बसों को सीज किया। एक बस जो अहमदाबाद (Ahmedabad) से जयपुर आ रही थी, उसे जब रोका गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। बस के इमरजेंसी गेट पर सामान रखकर उसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था और गलियारा भी जाम था। इस बस का मालिक यास्मीन खान (Yasmin Khan) बताया गया है। यात्रियों को उतारने के बाद बस को सीज कर विभाग के यार्ड में ले जाया गया, जहां उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
इसी तरह भुज से जयपुर आ रही एक अन्य बस में भी दोनों इमरजेंसी गेट के सामने सीटें लगी हुई थीं। इस बस पर भी चालान किया गया। साथ ही, सिंधी कैंप से जब्त की गई एक बस में अंदर से चार-चार स्लीपर सीटें लगी हुई थीं, जबकि बाहर से इमरजेंसी गेट दिख रहे थे। कई बसों की छत पर अवैध कैरियर भी पाए गए, जिन्हें तोड़कर हटा दिया गया।
दिल्ली में ‘ऑपरेशन डेडली परमिट’ के तहत भी बड़ी कार्रवाई हुई। रात भर चली इस कार्रवाई में करीब डेढ़ दर्जन बसें जब्त की गईं। मोरी गेट, राजौरी बॉर्डर, मयूर विहार और आईएसबीटी जैसे इलाकों में छापेमारी की गई। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है, जहां भी इसी तरह के उल्लंघनों की खबरें सामने आई हैं।
सामूहिक कार्रवाई से यात्रियों की सुरक्षा में हुई सुधार की उम्मीद
‘आजतक’ के रियलिटी चेक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैसे बस मालिक अधिक मुनाफे के चक्कर में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। इमरजेंसी गेट की जगह सीटें लगाना और बस की छत पर अवैध कैरियर बनाना जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों को उजागर किया गया है। इन राज्यों की सरकारों द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई उन यात्रियों के लिए राहत का संकेत है, जो रोजाना इन खतरनाक ‘सफरों’ में अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
हालांकि, सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या ये कदम स्थायी होंगे या कुछ ही दिनों में फिर से पुराने हालात लौट आएंगे। यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो और इन उल्लंघनों पर लगातार नजर रखी जाए।











