राज्यसभा चुनाव की स्थिति स्पष्ट, कितनी सीटें हो चुकी हैं निर्विरोध
राज्यसभा चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है। इस बार कुल 37 सीटों पर हो रहे चुनाव में से 26 उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध हो चुका है। हालांकि, तीन राज्यों की 11 सीटों पर मतदान के माध्यम से परिणाम तय होंगे, जो 16 मार्च को होंगे। इस चुनावी प्रक्रिया में बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में सत्तापक्ष एनडीए (NDA) और विपक्षी दलों के बीच कड़ी सियासी जंग देखने को मिल रही है।
निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की संख्या और बाकी सीटों का मुकाबला
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कई प्रमुख उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी, विनोद तावड़े और रामदास अठावले जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। महाराष्ट्र में सात, तमिलनाडु में छह, पश्चिम बंगाल में पांच, असम में तीन, तेलंगाना में दो, छत्तीसगढ़ में दो और हिमाचल प्रदेश में एक उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं।
तीनों राज्यों में चुनावी मुकाबला क्यों गर्म है?
अब हरियाणा, ओडिशा और बिहार की निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे इन राज्यों में सियासी संघर्ष तेज हो गया है। 16 मार्च को इन तीनों राज्यों में मतदान के जरिए चुनाव का परिणाम तय होगा। खासतौर पर ओडिशा में कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। यहाँ पर बीजेपी के दो उम्मीदवार मनमहोन सामल और सुजीत कुमार मैदान में हैं, जबकि पार्टी ने दिलीप रे का समर्थन किया है। वहीं, बीजेडी (BJD) से संतृप्त मिश्रा और कांग्रेस ने डॉ दत्तेश्वर मिश्रा को समर्थन दिया है। इन दोनों दलों के बीच मुकाबला कड़ा है, और चौथी सीट के लिए बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच टक्कर तय मानी जा रही है।
ओडिशा में एक राज्यसभा सीट के लिए 30 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। बीजेपी के पास अपने 79 विधायकों के साथ तीन निर्दलीय विधायक भी हैं, जिससे कुल समर्थन 82 हो जाता है, जो आवश्यक संख्या से आठ कम है। विपक्षी बीजेडी (BJD) के पास 48 विधायक हैं, जिससे एक सीट जीतने के बाद उसके पास 18 अतिरिक्त वोट बचेंगे, जो कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, और एक सीपीएम (CPM) का विधायक भी है। इस तरह, बीजेडी और कांग्रेस मिलकर आसानी से एक सीट जीत सकते हैं, लेकिन बीजेपी भी पूरी ताकत से मुकाबला कर रही है।
बिहार में पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी की ओर से नितिन नबीन और शिवेश कुमार मैदान में हैं, जबकि जेडीयू (JDU) से रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार भी चुनावी जंग में हैं। एनडीए (NDA) का तीसरा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा है, और आरजेडी (RJD) ने अमरेंद्र धारी सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। बिहार में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जबकि विपक्ष के पास 35 और अन्य के छह विधायक हैं। बीजेपी और जेडीयू के दोनों उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन कुशवाहा को अपनी जीत के लिए आरजेडी से समर्थन चाहिए। आरजेडी को छह विधायकों का समर्थन चाहिए, और उसने ओवैसी (Owaisi) की पार्टी का भी समर्थन मांगा है। अब देखना है कि कौन बाजी मारता है।
हरियाणा में भी सियासी जंग तेज हो गई है। यहाँ दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी से संजय भाटिया और कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, निर्दलीय सतीश नांदल ने भी पर्चा भरा है, जिनका समर्थन बीजेपी को प्राप्त है। एक सीट पर बीजेपी की जीत तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला होगा। हरियाणा की विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, जिनमें से बीजेपी के 48, कांग्रेस के 37, इनेलो के दो और तीन निर्दलीय विधायक हैं। इस आधार पर दोनों दल एक-एक सीट जीत सकते हैं, लेकिन पहले भी कांग्रेस के प्रत्याशी हार चुके हैं, इसलिए दूसरी सीट का मुकाबला सख्त होगा।









