रोहिणी आचार्य का विवादित बयान और बिहार चुनाव का असर
राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर तीखे शब्दों में अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए अपने भाई तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इस पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ता है और अहंकार हावी हो जाता है, तो अंततः विनाश ही होता है।
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद लालू परिवार में विवाद की खबरें सामने आई थीं। इस चुनाव में आरजेडी को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि एनडीए ने शानदार जीत हासिल की। पार्टी केवल 25 सीटें जीत सकी, जबकि गठबंधन ने 200 से अधिक सीटें हासिल कर बहुमत प्राप्त किया। इस हार के बाद रोहिणी आचार्य ने अपने राजनीतिक करियर को छोड़ने का ऐलान कर दिया।
तेजस्वी यादव पर लगाए गंभीर आरोप और परिवार से दूरी
रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि उनके भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सांसद संजय यादव ने उन्हें अपमानित किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ने उनके साथ गाली-गलौज की और यहां तक कि उन्हें चप्पल से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद उन्होंने अपने परिवार से दूरी बना ली और कहा कि उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्हें अपने माता-पिता और भाई-बहनों को छोड़कर घर से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिवार के कुछ सदस्यों ने उनके पिता को किडनी दान देने को लेकर उनका मजाक उड़ाया। साथ ही, उन्होंने कहा कि उनके ऊपर यह आरोप लगाए गए कि उन्होंने अपने पिता को ‘गंदी किडनी’ देने और इसके बदले करोड़ों रुपये लेने का प्रयास किया।
राजनीतिक विवाद और परिवार के भीतर तनाव का वर्तमान स्वरूप
रोहिणी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका निर्णय भावनात्मक नहीं था, बल्कि यह उनके परिवार से बाहर निकलने का एक ठोस कदम था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हार की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और सवाल उठाने वालों को दबाया जा रहा है। उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके सलाहकार संजय यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम किया जा रहा है। इस विवाद ने बिहार की राजनीति में नई ज्वाला जला दी है, और यह चर्चा का विषय बना हुआ है।










