नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव लड़ने का फैसला और पार्टी में हलचल
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के निर्णय के बाद पार्टी के भीतर तनाव बढ़ गया है। पटना में जेडीयू कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का कड़ा विरोध किया।
उमेश कुशवाहा का कार्यकर्ताओं को आश्वासन और पार्टी की स्थिति
प्रदर्शन के समय प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अभी तक नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझा जाएगा और उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी।
नीतीश कुमार का राज्यसभा चुनाव और बिहार में राजनीतिक असमंजस
जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों से जनता ने उन पर भरोसा किया है और उसी भरोसे के बल पर उन्होंने बिहार की सेवा की। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार को उनका पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलेगा।
वहीं, नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद उनके पैतृक गांव कल्याण बिगहा में भी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जनता ने एनडीए को वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर दिया था, न कि भाजपा के नाम पर। ग्रामीणों का मानना है कि बिहार के लिए उनसे बेहतर नेता कोई नहीं हो सकता।
इसके अलावा, जेडीयू नेताओं ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर सकते हैं। चर्चा है कि उन्हें नई सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।










