बांकीपुर उपचुनाव के बीच आरजेडी को बड़ा झटका
बिहार की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को एक बड़ा नुकसान पहुंचा है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता और प्रमुख नेता मृत्युंजय तिवारी ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने त्यागपत्र में तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनके कारण पार्टी में अंदरूनी खींचतान और असंतोष बढ़ रहा है।
मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा और उसके पीछे की वजहें
मृत्युंजय तिवारी का आरजेडी से इस्तीफा केवल एक पद छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह पार्टी के अंदर चल रही गहरी असंतोष और दर्द का सार्वजनिक प्रकटीकरण है। उन्होंने कहा कि जब पार्टी अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही थी, तब लालू प्रसाद यादव ने उन्हें प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने पूरी ईमानदारी से कार्य किया, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
तिवारी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में उन्हें अपमानित किया गया, जिसकी शिकायत उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और तेजस्वी यादव से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में कुछ लोग अपने स्वार्थ के कारण तेजस्वी यादव की बात नहीं मानते और हाईजैक कर रखी है। लालू यादव और राबड़ी देवी भी अब पार्टी के कामकाज में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं, जबकि संगठन के कुछ लोग पार्टी पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं।
पार्टी छोड़ने के पीछे की पुरानी और नई नाराजगी
मृत्युंजय तिवारी ने अपने इस्तीफे में तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग पार्टी को दीमक की तरह खा रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह समस्या केवल वर्तमान में नहीं है, बल्कि पहले भी लालू परिवार की बेटी रोहिणी आचार्य और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने इन ही नेताओं के कारण पार्टी छोड़ दी थी।
रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी के मुख्य राजनीतिक सलाहकारों जैसे संजय यादव और रमीज खान पर आरोप लगाए थे कि ये लोग तेजस्वी को परिवार और जमीन से काट रहे हैं, मनमर्जी चला रहे हैं और पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं का अपमान कर रहे हैं। अब मृत्युंजय तिवारी ने भी इन नेताओं को दीमक कहा है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और नाराजगी का जड़ें एक ही ‘सिंडिकेट’ से जुड़ी हैं।











