बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए
बिहार में नए साल की शुरुआत में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी और कठोर कार्रवाई देखने को मिली है। पटना जिले के बिहटा अंचल के भूमि राजस्व विभाग से जुड़े एक गंभीर मामले में विजिलेंस ने तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसा है। यह कदम भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक जांच के बाद उठाया गया है, जिसे विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी का खुलासा
राजस्व और भूमि सुधार विभाग को प्राप्त 11 शिकायतों के आधार पर बिहटा अंचल के सिकंदरपुर मौजा में भूमि अधिग्रहण वाद संख्या 01/2011-12 की जांच की गई। यह अधिग्रहण मेगा औद्योगिक पार्क के निर्माण के लिए भूमि बैंक के तहत किया गया था। जांच में पता चला कि किसानों को मुआवजा भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। विस्तृत जांच में लगभग 55 लाख रुपये के फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य की दिशा
इस भ्रष्टाचार मामले में पटना जिले के तत्कालीन जिला भू अर्जन पदाधिकारी, अपर जिला भू अर्जन पदाधिकारी, भू अर्जन कार्यालय के कानूनगो, सहायक, प्रधान सहायक, अमीन, बिहटा अंचल के तत्कालीन अंचाधिकारी, राजस्व कर्मचारी और एक गैर लोक सेवक शामिल पाए गए हैं। इन सभी के खिलाफ निगरानी थाना में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह विजिलेंस की कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का प्रयास है, बल्कि भूमि मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे आम जनता का विभाग पर भरोसा बढ़ेगा और अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी का संकेत है।











