उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू का कहर जारी
बिहार सहित पूरे उत्तर भारत में इन दिनों तेज़ गर्मी और लू का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनता की दिनचर्या को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं। यह गर्मी न केवल जीवनशैली को प्रभावित कर रही है, बल्कि लोगों की सेहत पर भी स्पष्ट असर डाल रही है।
मरीजों की संख्या में हो रही तेजी से बढ़ोतरी
मौसम विभाग के अनुसार, मुजफ्फरपुर जिले में अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तीव्र वृद्धि देखी जा रही है। सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। सदर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग शामिल हैं। अधिकतर मरीज लू, बुखार, सर्दी-खांसी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और भी गंभीर हो रही हैं।
गर्मी और लू से बचाव के उपाय और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां
मौसम विभाग के अनुसार, जिले का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, और दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच स्थिति और भी अधिक गंभीर हो जाती है। इस समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए घर से बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। सदर अस्पताल के डॉक्टर ज्ञानेंदु कुमार के अनुसार, लू लगने का खतरा खासतौर पर छोटे बच्चों में अधिक होता है। लू के लक्षणों में उल्टी, दस्त, शरीर का अत्यधिक गर्म होना, आंखों का पीला पड़ना और पेशाब का गाढ़ा होना शामिल हैं। शरीर में कमजोरी और भूख कम लगना भी इसके संकेत हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें, यदि जरूरी हो तो सिर ढंककर बाहर जाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए ORS, लस्सी, नारियल पानी, खीरा और तरबूज का सेवन लाभकारी माना गया है। साथ ही साफ और उबला हुआ पानी पीने की भी सलाह दी गई है। खुले में बिकने वाले खाने से दूरी बनाए रखने को कहा गया है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
इसके साथ ही मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (AES) को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। यह बीमारी खासतौर पर गर्मी के मौसम में बच्चों को प्रभावित करती है। इस बार विभाग ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। सदर अस्पताल और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं और मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, AES के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, ऐंठन, बेहोशी और कमजोरी शामिल हैं। यदि इन लक्षणों का अनुभव हो, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है। साथ ही झाड़-फूंक जैसी परंपरागत उपचारों से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे सतर्क रहें और गर्मी तथा लू से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाएं।










