बिहार में सब्जी और मसाले की खेती का विस्तार
बिहार सरकार ने सब्जी और मसाले की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू की है, जिसमें टमाटर, मिर्च और लहसुन की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य फसलों के उत्पादन में वृद्धि करना है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में सुधार हो। इस योजना का लाभ बिहार के 26 जिलों को मिलेगा, जिनमें अररिया, औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, पूर्वी चंपारण, गया, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, शेखपुरा और वैशाली शामिल हैं।
कृषि योजना का विवरण और लाभ
यह योजना किसानों को टमाटर, मिर्च और लहसुन की खेती के लिए प्रोत्साहित करती है, जिसमें प्रत्येक समूह में छह हेक्टेयर क्षेत्र शामिल होगा। हर समूह में कम से कम तीन किसान सदस्य होंगे। केंद्र सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत, टमाटर और मिर्च की खेती पर प्रति हेक्टेयर लागत लगभग 0.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस लागत का 50 प्रतिशत अनुदान किसानों को एकमुश्त डीबीटी (DBT) इन-कैश या इन-किंड के माध्यम से मिलेगा, जिसमें 40 प्रतिशत पहली किस्त और 10 प्रतिशत टॉप-अप शामिल है। लहसुन की खेती के लिए लागत मूल्य 1.00 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय किया गया है, और इस योजना के तहत किसानों को कुल 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। यह अनुदान दो भागों में मिलेगा, जिसमें पहली किस्त में पौध सामग्री और INM/IPM सामग्री की खरीद पर 60 प्रतिशत और खेती के सत्यापन के बाद दूसरी किस्त में 40 प्रतिशत डीबीटी इन-कैश या इन-किंड के रूप में दी जाएगी।
कृषि समर्थन और सरकारी योजनाएं
सरकार ने किसानों को समर्थन देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 1223 लाख टन अनाज की खरीद की है, जिससे किसानों को लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा, बीएयू (Bihar Agricultural University) सबौर का XRD उपकरण ओडिओआई (ODI) श्रेणी में शामिल किया गया है, जो कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा देगा। दक्षिण भारत के सुपारी किसानों को आयात नियमों के कारण बड़ा नुकसान हो रहा है, वहीं भारत अब मीट उत्पादन में पांचवें स्थान पर है, और दूध तथा अंडे के उत्पादन में पहले और दूसरे स्थान पर कायम है। साथ ही, भारतीय टी बोर्ड बड़े स्तर पर चाय का प्रचार कर रहा है, क्योंकि भारत इंडियन टी का पांचवां सबसे बड़ा खरीदार है।










