बिहार के नक्सली प्रभावित क्षेत्र में मतदान का पुनः शुरुआत
2005 में भीम बांध क्षेत्र में नक्सली हमले के दौरान सात पुलिसकर्मी और एसपी सहित कई अधिकारी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद से सुरक्षा कारणों से इन इलाकों में मतदान केंद्रों को हटा दिया गया था। लेकिन बीस साल बाद अब इन क्षेत्रों में सात मतदान केंद्रों पर फिर से वोटिंग का आयोजन किया गया है। यह कदम क्षेत्र में लोकतंत्र की बहाली और जनता की भागीदारी को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का उत्साह और बदलाव की उम्मीद
81 वर्षीय बुजुर्ग मतदाता विशुन देव सिंह ने मतदान के बाद कहा, “2005 से पहले हम अपने गांव में ही मतदान करते थे। नक्सली घटना के बाद मतदान केंद्र को बीस किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया था। बुजुर्ग और महिलाएं इतनी दूर नहीं जा पाती थीं, जिससे मतदान प्रतिशत में गिरावट आती थी। अब फिर से गांव में मतदान केंद्र बन जाने से हम बहुत खुश हैं और चुनाव आयोग का धन्यवाद करते हैं।”
युवा मतदाता बादल प्रताप ने भी इस पल को गर्व का बताया। उन्होंने कहा, “बीस साल बाद गांव में मतदान हो रहा है, यह हमारे लिए बहुत गर्व का क्षण है। पहले बूथ दूर होने के कारण हम वोट नहीं डाल पाते थे, लेकिन अब गांव में मतदान कर बहुत अच्छा लग रहा है।” साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस क्षेत्र के विकास पर ध्यान देगी, क्योंकि नक्सल प्रभाव के कारण यहां शिक्षा और रोजगार की स्थिति खराब है।
महिला भागीदारी और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व
महिला मतदाता नीलम देवी ने कहा, “कई वर्षों बाद गांव में मतदान केंद्र बना है। पहले दूर होने के कारण महिलाएं मतदान नहीं कर पाती थीं। इस बार गांव में वोट डालकर बहुत अच्छा लग रहा है।”
प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में बीस साल बाद मतदान हो रहा है। केंद्रीय पुलिस बल की तैनाती की गई है और हर बूथ पर निगरानी रखी जा रही है। जब ईवीएम की बटन दबाई गई, तो गांव में लोकतंत्र का जोश और उम्मीद दोनों फिर से जाग उठी।










