नीतीश कुमार का धार्मिक स्थलों पर पहुंचना राजनीतिक संकेत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम शुक्रवार को घोषित होंगे, लेकिन उससे पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना की, जिससे सियासी माहौल में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। पटना में उन्होंने मंदिर, मजार और गुरुद्वारा में माथा टेककर अपने राजनीतिक संदेश को स्पष्ट किया है।
सियासी संदेश और धार्मिक स्थलों का महत्व
18 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर काबिज नीतीश कुमार ने इस बार अपनी सत्ता की वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव परिणाम से पहले आए एग्जिट पोल में एनडीए की सरकार बनती दिख रही है, जिससे जेडीयू समर्थक उत्साहित हैं। इस बीच, नीतीश कुमार ने अपने करीबी मंत्री विजय चौधरी और अशोक चौधरी के साथ भगवान की शरण में जाकर हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के धार्मिक स्थलों पर माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
धार्मिक स्थलों पर नीतीश का दौरा और राजनीतिक संदेश
सबसे पहले नीतीश कुमार पटना जंक्शन के पास स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बजरंगबली के दर्शन किए और पूजा की। इसके बाद उन्होंने किशोर कुणाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। महावीर मंदिर में पूजा करने के बाद, मुख्यमंत्री पटना साहिब गुरुद्वारा भी गए, जहां उन्होंने माथा टेककर सभी धर्मों का सम्मान जताया।
इसके बाद नीतीश कुमार ने पटना हाईकोर्ट के निकट नेहरू पथ पर स्थित दरगाह पहुंचकर हजरत शाह जलाल शहीद रहमतुल्लाह की मजार पर चादर चढ़ाई। उन्होंने बिहार की समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान, उन्होंने सभी समुदायों के बीच भाईचारे का सियासी संदेश भी दिया।
मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने ईश्वर का धन्यवाद किया और बिहार की शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया के लिए जनता और भगवान का आभार व्यक्त किया। नीतीश का मानना है कि जनसेवा ही उनका धर्म है, और वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। इस तरह का धार्मिक दौरा उनके सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की उनकी नीति का हिस्सा है।











