बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों का वित्तीय प्रदर्शन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान दस प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर लगभग 281.32 करोड़ रुपये का फंड जुटाया, जबकि इन पार्टियों ने अपने प्रचार-प्रसार और चुनावी गतिविधियों पर करीब 193.47 करोड़ रुपये खर्च किए। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक धनराशि प्रचार और नेताओं के दौरे पर खर्च हुई है। इस वित्तीय रिपोर्ट में जुटाए गए फंड और खर्च के बीच लगभग 88 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर भी देखा गया है।
चुनावी खर्च में डिजिटल और प्रचार गतिविधियों का वर्चस्व
राजनीतिक दलों ने केवल रैलियों और विज्ञापनों पर ही पैसा नहीं लगाया, बल्कि अपने उम्मीदवारों की सीधी मदद के लिए भी फंड का उपयोग किया। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को एकमुश्त 62.07 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वर्चुअल प्रचार के लिए भी पार्टियों ने भारी रकम खर्च की। फेसबुक, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर माहौल बनाने के लिए करीब 13.07 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया गया है।
आयोग के नियमों और फंडिंग में पारदर्शिता का महत्व
चुनाव आयोग के सख्त नियमों के कारण इस बार राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को मीडिया में उजागर करने के लिए भी खर्च करना पड़ा। इस कार्य के लिए पार्टियों ने लगभग 3.88 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा, छोटे-मोटे खर्चों में कुल 14.80 करोड़ रुपये का हिसाब दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन दस बड़ी पार्टियों ने अपने फंडिंग स्रोतों और खर्च का विवरण सार्वजनिक किया है, जबकि कुछ पार्टियों जैसे बसपा ने चुनाव के दौरान फंड जुटाने की कोई जानकारी नहीं दी। बिहार में कुल 161 राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे, लेकिन विश्लेषण केवल उन दस प्रमुख पार्टियों तक ही सीमित रहा, जिनके वित्तीय आंकड़े उपलब्ध थे।









