बिहार में कैबिनेट विस्तार की राजनीतिक हलचल तेज
बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। जदयू ने अपने लिए 16 मंत्री पदों की मांग रखी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि सभी की नजरें भाजपा के फैसले पर टिकी हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। वर्तमान में जदयू के केवल दो मंत्री ही शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हैं। इस दौरान बड़े नेताओं के भाग लेने की संभावना जताई जा रही है। सहयोगी दलों की हिस्सेदारी को लेकर भी चर्चा जारी है, जबकि निशांत कुमार संगठन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
शपथ ग्रहण में पीएम मोदी समेत बड़े नेता शामिल हो सकते हैं
सूत्रों के अनुसार, आगामी गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Modi), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं के भाग लेने की संभावना है। इस नए गठबंधन में जदयू और भाजपा के अलावा चिराग पासवान की एलजेपी (LJP), जीतन राम मांझी की हम पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी भी शामिल हैं। पिछली सरकार में इन सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व मिला था, और अब नई कैबिनेट में भी उनकी हिस्सेदारी को लेकर चर्चा जारी है।
निशांत कुमार की ‘सद्भाव यात्रा’ और संगठन पर ध्यान
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाने के सवाल पर कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने चाहा था कि निशांत मंत्री बनें, लेकिन उन्होंने फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। हाल ही में निशांत कुमार ने ‘सद्भाव यात्रा’ शुरू की है, जिसके माध्यम से वह जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं। कुल मिलाकर, बिहार में कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जदयू को कितनी हिस्सेदारी मिलती है।










